(रश्मिरथी तृतीय सर्ग पर आधारित,
कृपया पूरा पढ़ें।)
वर्षों तक 'लैब' में बैठ बैठ,
जब वायरस तक हो गई पैठ,
"चीनी" लाए एक नया रोग,
दुनिया में जिससे मरें लोग,
षड्यंत्र प्रलय ही बोता है,
देखें, आगे क्या होता है।
'प्रियतम' की चाल छुपाने को,
और अपनी साख बचाने को,
अमरीका को समझाने को,
भीषण विध्वंस बचाने को,
डब्लयू एच ओ आगे आया,
निर्दोष चीन को बतलाया।
"हो न्याय अगर तो ऐसा हो
व्यापार पूर्ववत जैसा हो,
आरोप कोई ना अर्थदंड,
छोड़े अमरीका निज घमंड,
ये विपदा मिल के जीतेंगे
दुनिया को फिर से सिंचेंगे !"
अमरीका को मंजूर न था,
वो झुकने को मजबूर न था ,
डब्लयू एच ओ को धमकाया,
संदिग्ध भूमिका बतलाया।
"कल से हम फंड नहीं देंगे।
हां, कोई मदद नहीं लेंगे।"
"चाहे जितना टाइम ले लो,
कुछ प्रश्नों के उत्तर दे दो,
क्यों इतना वक्त लगाए तुम,
दुनिया से तथ्य छुपाए तुम,
क्यों वायरस इटली पहचाने,
पर बीजिंग संघाई ना जाने।"
"क्यों तुमने भरी उड़ानें थी
क्या इतनी सस्ती जानें थी ?
हर मुल्क लड़ाई में जुटा,
पर तेरा घर कैसे छूटा ?
संदिग्ध तुम्हारे दावे हैं,
ये निराधार बहकावे हैं।"
डब्ल्यू एच ओ चिंता में लीन,
बोला सहला के हाथ चीन,
"तुम तनिक नहीं चिंता करना,
इस अमरीका से ना डरना,
हम तेरा फंड बढ़ा देंगे,
हां, दुनिया को दिखला देंगे।"
"यह देख, मेरी क्या क्षमता है,
'सुई' से 'बम' तक बनता है,
मेरा है कारोबार सकल,
मेरा ग्राहक संसार सकल,
किस मुल्क में मेरी पैठ नहीं।
तुम पता लगा लो सही सही।"
"दुनिया में बिकता है जो माल,
उसमें मेरा हिस्सा विशाल,
एशिया-यूरोप को घेरे हैं,
सागर पर्वत सब मेरे हैं,
पहले मैं कर्जे देता हूं,
फिर कब्जे में कर लेता हूं।"
इस बीच खबर ये आम हुई,
हर कब्र लाश से जाम हुई,
रोके नहीं रुकता था प्रसार,
इटली में मची थी हहाकार,
कुछ दिन के भीतर लाख मरे,
स्पेन-फ्रांस सब मुल्क डरे।
अब तक अमरीका चंगा था,
लेकिन ये चीन से पंगा था,
हां, घातक ये महामारी थी,
अब अमरीका की बारी थी,
न्यूयार्क लपेटे में आया।
सड़कों पे सन्नाटा छाया।
ये देख ट्रंप की नींद उड़ी,
है इससे अपनी छवि जुड़ी,
गर लॉक डाउन अपनाएंगे,
इकोनॉमी बचा न पाएंगे,
इसका अंजाम बुरा होगा,
सोचो चुनाव का क्या होगा !
पर बद से बदतर हुआ हाल,
कम पड़ने लगे थे अस्पताल,
"ऐ चीन ! तुम्हे सिखलाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।
याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन जय या कि मरण होगा।"
‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर,
बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
फण शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुँह खोलेगा।
ऐ चीन ! युद्ध ऐसा होगा।
फिर कभी नहीं जैसा होगा।
"दुश्मन को दोस्त बनाएंगे,
जापान-रूस सब आएंगे,
हर मुल्क तुम्हें ठुकराएंगे,
ऐसा प्रतिबंध लगाएंगे।
आखिर तू भूशायी होगा,
हिंसा का पर, दायी होगा।’
था विश्व सन्न, सब लोग डरे,
कोरोना से बेहोश पड़े,
भारत तटस्थ था दूर खड़ा,
था सजग मगर रुख लिए कड़ा,
फिलहाल मुझे दीजे विराम,
करता हूं कर वंदन प्रणाम। 🙏
✍️उमाशंकर "अनुज"


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews