स्वच्छता , सफाई

स्वच्छता , सफाई

दीपावली के उपलक्ष्य में ,
चला स्वच्छता अभियान ।
तम भगा ज्योति जलेगा ,
लक्ष्मी आए इस दरम्यान ।।
घर के अंदर घर के बाहर ,
घास फूस गंदगी न पाए ।
गाॅंव के जन जन रहें पीछे ,
माॅं लक्ष्मी मेरे घर आऍं ।।
घर अंदर बाहर है साफ ,
अंतर्मन यह साफ कहाॅं ।
अंतर्मन जब साफ नहीं ,
माॅं लक्ष्मी से माफ कहाॅं ।।
मन रहता उथल पुथल ,
मन में वास केवल भ्रांति ।
मिथ्या फिर लक्ष्मी गणेश ,
जब अंतर्मन नहीं शांति ।।
अपनी मर्यादा में नहीं हम ,
लक्ष्मी गणेश मान कहाॅं ।
लक्ष्मी गणेश है मान नहीं ,
हमें मिलना सम्मान कहाॅं ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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