पितरों की कृपा से भोग और मोक्ष दोनों
संकलनकर्ता आनंद हठिला
मार्कण्डेय पुराण में रुचि महाराज की कथा 👇🏻
"जिसने पितरों को लटका देखा, वही मन्वन्तर का निर्माता बना। मार्कण्डेय पुराण की रुचि कथा सिखाती है - पितरों की एक प्रार्थना खोया राज्य भी लौटा देती है और वंश को मन्वन्तर तक अमर कर देती है। पितृपक्ष में इस स्तुति को अवश्य सुनें।"
ये कथा मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 94 से 100 तक में आती है। यही वह कथा है जिससे प्रसिद्ध पितृ स्तुति प्रकट हुई है, जिसे पितृपक्ष में पढ़ना सबसे फलदायी माना जाता है।
भाग 1👉🏻 वैरागी रुचि और पितरों का आकाश में दर्शन
प्राचीन काल में रुचि नाम के महातेजस्वी ब्रह्मर्षि थे। वे वेद-वेदांग के ज्ञाता, जितेन्द्रिय और कठोर तपस्वी थे। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत ले रखा था, इसलिए विवाह नहीं किया। उनका मानना था - विवाह बंधन है, मोक्ष में बाधा है।
एक दिन वे भ्रमण करते हुए वन में गए और वहाँ उन्होंने आकाश में चार दिव्य पुरुषों को अधोमुख लटके हुए देखा। उनके मुख मलीन थे।
रुचि ने पूछा 👉🏻 आप कौन हैं?
उन्होंने कहा 👇🏻
वयं तव पितरः पुत्र! पितामह प्रपितामहा:
नाम्ना तु वसुसत्याद्या अध: पतामहो वयम्॥
अर्थ 👉🏻 हे पुत्र! हम तुम्हारे पितर हैं - तुम्हारे पिता, पितामह और प्रपितामह। वसु, सत्य आदि नाम वाले हम अधोगति को जा रहे हैं।
रुचि ने आश्चर्य से पूछा 👉🏻 आप तो पुण्यात्मा हैं, अधोगति क्यों?
पितरों ने कहा 👉🏻 वत्स, तुमने विवाह नहीं किया, संतान नहीं उत्पन्न की। शास्त्र कहता है - *अपुत्रस्य गतिर्नास्ति*।
पुत्र-पौत्र द्वारा पिंड-जल न मिलने से हमारा पुण्य क्षीण हो रहा है। तुम हमारे वंश के अंतिम दीपक हो। यदि तुम भी निष्काम रहे तो हमारा वंश और हमारी गति दोनों समाप्त हो जाएगी। यही पितृ-ऋण है।
यह सुनकर रुचि का हृदय कांप गया। जिस वैराग्य को वे मोक्ष समझ रहे थे, वह उनके पितरों के लिए बंधन बन गया था।
भाग 2👉🏻 रुचि कृत पितृ स्तुति पितृपक्ष का हृदय 👇🏻
अपने पितरों को इस कष्ट में देख रुचि ने हाथ जोड़कर उस स्तुति का गान किया जो आज पितृपक्ष में घर-घर पढ़ी जाती है।
पहला श्लोक 👉🏻 पितरों को नमन:👇🏻
अर्चितानाममूर्तानां पितॄणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्॥
- मार्कण्डेय पुराण 97.5
अर्थ 👉🏻 जो अर्चना के योग्य, निराकार, अत्यंत तेजस्वी, ध्यानपरायण और दिव्य दृष्टि वाले हैं, उन पितरों को मैं सदा प्रणाम करता हूँ।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्॥
अर्थ 👉🏻 जो इंद्र आदि देवताओं के भी नायक हैं, दक्ष और मरीचि के भी पथप्रदर्शक हैं, सप्तर्षियों के भी पूज्य हैं और मन की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं, उन पितरों को प्रणाम।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्द्रमसोस्तथा।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितॄनप्युदधावपि॥
अर्थ 👉🏻 जो मनु आदि राजाओं, सूर्य-चन्द्र के भी नेता हैं, जो समुद्र में भी व्याप्त हैं, उन सभी पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ।
रुचि की इस सच्ची श्रद्धा और स्तुति से प्रसन्न होकर पितर बोले - वत्स, हम तुझ पर प्रसन्न हैं। तू विवाह कर। तेरी पत्नी पतिव्रता और तेरा पुत्र मन्वन्तर का स्वामी होगा।
भाग 3: खोया हुआ राज्य और मन्वन्तर का स्वामी बनना 👇🏻
पितरों के आशीर्वाद से रुचि ने नदी के किनारे तप किया और पितरों के कहने पर ही स्वयं एक कन्या का मानसिक सृजन किया, जिसका नाम मालिनी हुआ। कुछ मतों में मालिनी नदी ही मानवी रूप में आईं। रुचि ने विधिवत मालिनी से विवाह किया।
विवाह के बाद पितरों की कृपा का फल तुरंत मिला। रुचि के पिता का राज्य जो शत्रुओं ने छीन लिया था, पितरों के तेज से बिना युद्ध के ही प्राप्त हो गया। प्रजा ने स्वयं आकर रुचि को राजा बनाया। रुचि ने धर्मपूर्वक राज्य किया।
समय आने पर रुचि और मालिनी को एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम रखा गया *रौच्य*।
मार्कण्डेय जी कहते हैं 👇🏻
रुचे: पुत्रो महातेजा रौच्यो नाम मनु: स्मृत:।
त्रयोदशे मनौ काले भविष्ये तस्य शासनम्॥
अर्थ 👉🏻 रुचि का महातेजस्वी पुत्र रौच्य नाम से प्रसिद्ध मनु होगा। भविष्य में तेरहवें मन्वन्तर का स्वामी वही होगा।
और स्वयं रुचि महाराज को अपने सत्य, तप, पितृभक्ति और प्रजा-पालन के गुणों के कारण ब्रह्मा जी ने प्रजापति पद दिया। वे भी एक मन्वन्तर में सप्तर्षियों में पूजित हुए। इस प्रकार एक वैरागी ब्राह्मण पितरों के आशीर्वाद से राजा बना और फिर सृष्टि के विधान का स्वामी बना।
इस कथा का सार यही है -
वैराग्य अपनी जगह, पर पितृऋण से मुक्त हुए बिना मोक्ष नहीं। विवाह और संतान केवल भोग नहीं, पितरों को तारने का यज्ञ है।〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8
0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews