विलीन होती भारतीयता

विलीन होती भारतीयता

जय प्रकाश कुवंर
बड़ा और सभ्य बनने की होड़ ने,
कुछ ऐसा जादू कर दिया,
कि हम अपना सब कुछ,
डूबोते चले गए।
अपनी विरासत, अपना संस्कार,
अपनी भारतीय पहचान,
हम सब कुछ खोते चले गए।।
पश्चिम वालों ने हमें,
डैडी कहना क्या सिखाया,
हमने जन्म देने वाले को,
पिता कहना छोड़ दिया।
मम्मी कहने का लत ऐसा लगा,
कि अपना दुध पिलाने वाली,
उस देवी तुल्य जननी को,
हमने माता पुकारने से मुंह मोड़ लिया।।
अब तो हम अपनी बिटिया को,
जूली कह कर पुकारते हैं।
बिटिया को लक्ष्मी, दूर्गा , पार्वती,
नाम रखने से नकारते हैं।।
हमारा बेटा अब नाम से,
गुल्लू, पप्पू बन गया।
राम कृष्ण नाम रखना,
आधुनिक सभ्यता को खल गया।।
गुलामी ने ऐसा असर डाला,
हम दिमाग से गुलाम बन गये।
अपनी संस्कृति भारतीयता छोड़,
बहुत सारे मामलों में,
हम अंग्रेजियत में ढल गये।।
अब भी मौका है,
अपनी विरासत को बनाए रखने का।
गुलामियत का फल खुब चख चुके हैं,
अब फिर से नहीं वैसा फल चखने का।।
जय प्रकाश कुवंर
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ