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मणिकर्णिका शक्तिपीठ काशी

मणिकर्णिका शक्तिपीठ काशी

लेखक आनंद हठिला
हिंदू धर्म में 51 शक्तिपीठों में अत्यंत पूजनीय और आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ माना गया है। काशी के सुप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर स्थित यह पीठ सती के आभूषण और शिव-शक्ती के अनंत संबंध का प्रतीक है।

प्रजापति दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव का निरादर होने पर माता सती ने यज्ञकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। सती के वियोग से व्याकुल होकर भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को अपने कंधों पर धारण कर ब्रह्मांड में तांडव करने लगे, जिससे सृष्टि संकट में पड़ गई।
सृष्टि के संतुलन हेतु भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर को ५१ भागों में विभाजित कर दिया।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, काशी के इस पवित्र तट पर माता सती के कान का आभूषण-'मणिकर्णिका' (मणि जड़ित कुंडल) गिरा था।

सती के कुंडल (मणि) के गिरने के कारण इस स्थान का नाम 'मणिकर्णिका' पड़ा। यहाँ स्थापित मुख्य शक्ति को 'विशालाक्षी' (विशाल नेत्रों वाली) और उनके साथ विराजमान भैरव को 'कालभैरव' (या संजीव) के रूप में पूजा जाता है।

चक्रपुष्करिणी कुंड और भगवान विष्णु-शिव की कथा
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मणिकर्णिका घाट की उत्पत्ति से जुड़ी एक अत्यंत प्राचीन पौराणिक कथा भगवान विष्णु की तपस्या से भी संबंधित है:

सृष्टि निर्माण से पूर्व की कथा 👇🏻

जब इस सृष्टि का निर्माण हो रहा था, तब भगवान विष्णु ने यहाँ कठोर तपस्या की। अपने तप से उत्पन्न पसीने से उन्होंने एक कुंड का निर्माण किया, जिसे 'चक्रपुष्करिणी कुंड' कहा गया।

शिव जी का कुंडल गिरना 👇🏻

भगवान विष्णु की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती वहाँ प्रकट हुए। जब शिव जी ने प्रसन्नतापूर्वक अपना सिर हिलाया, तो उनके कान का रत्नजटित कुंडल (मणिकर्णिका) टूटकर उसी कुंड में गिर गया।

इस कारण भी इस स्थान को मणिकर्णिका क्षेत्र कहा जाने लगा। मान्यता है कि यह कुंड स्वयं भगवान विष्णु के चक्र द्वारा निर्मित है।

मोक्षदायिनी' मणिकर्णिका का आध्यात्मिक महत्त्व
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काशी (वाराणसी) को 'अविमुक्त क्षेत्र' माना जाता है, जो कभी नष्ट नहीं होता। मणिकर्णिका शक्तिपीठ इस मोक्षनगरी का मूल केंद्र है:

महाश्मशान की मान्यता 👇🏻

मणिकर्णिका घाट को संसार का सबसे बड़ा महाश्मशान माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ कभी चिता की अग्नि शांत नहीं होती। यहाँ देह त्यागने वाले प्राणी को स्वयं भगवान शिव 'तारक मंत्र' सुनाते हैं और माता विशालाक्षी उसे मोक्ष प्रदान करती हैं।

जीवन और मृत्यु का चक्र 👇🏻

यह पीठ मनुष्य को जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का साक्षात्कार कराती है। यहाँ शक्तिपीठ का अर्थ केवल शोक नहीं, बल्कि परम आनंद और मुक्ति की प्राप्ति है।

मणिकर्णिका पीठ की मुख्य विशेषताएँ
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विशालाक्षी मंदिर 👇🏻


मणिकर्णिका घाट की संकरी गलियों में माता विशालाक्षी का भव्य मंदिर स्थित है, जहाँ नवरात्रि के दौरान दक्षिण भारत और उत्तर भारत दोनों परंपराओं से विशेष पूजा-अर्चना होती है।


शक्ति और मोक्ष का संगम:👇🏻


51 शक्तिपीठों में यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ सती का दिव्य आभूषण गिरा और जो साक्षात मोक्ष का द्वार भी कहलाता है।〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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