शारदीय नवरात्रि पर भक्तिमय कविता
डॉ अनमोल कुमार
आई है नवरात्रि, माँ के द्वार सजाओ,
लाल चुनरिया, सिंदूर से श्रृंगार कराओ।
शंख बजे, ढोल बजे, जयकारा लगे भारी,
शेर पर चढ़कर आई, माँ शेरों वाली प्यारी।
पहले दिन शैलपुत्री, दूजे ब्रह्मचारिणी माँ,
तीजे चंद्रघंटा, कूष्मांडा रूप है चौथा।
पंचम स्कंदमाता, षष्ठी कात्यायनी कहलाए,
सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी मन भाए,
नवम सिद्धिदात्री, सब सिद्धि दे जाए।
नौ दिन माँ व्रत रखे, भक्त दरस को आए,
जो सच्चे मन से ध्याए, वो मनवांछित फल पाए।
हे जगत जननी, अम्बे, दुख हरने वाली,
अपने भक्तों पर करना, कृपा माँ निराली।
नवरात्रि की शुभ बेला, खुशियाँ भर लाओ,
माँ दुर्गे के चरणों में, शीश झुकाओ।
*बोलो - जय माता दी!*
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