Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से

पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से

कुमार महेंद्र
विज्ञान-प्रौद्योगिकी का युग,
ज्ञान-साधना का विस्तार।
शोध-अनुसंधान सफल हों,
खुलें प्रगति के नव द्वार।
बुद्धि, विवेक, सामर्थ्य मिले,
सफलता मिले श्रम-साधना से।
पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से।।


सिंहवाहिनी, चतुर्भुज धारिणी,
दिव्य तेज की छटा निराली।
दक्षिण कर अभय-वरदायिनी,
वाम करों में खड्ग-कमल धारी।
रोग-शोक-संताप मिटें,
संकट दूर हों माँ की वंदना से।
पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से।।


महर्षि कात्यायन की तपस्या से,
प्रकट हुईं जगकल्याणी।
कात्यायनी नाम सुशोभित,
महिमा तेरी मंगलदायिनी।
मनोकामनाएँ पूर्ण हों,
माँ की स्तुति-अर्चना से।
पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से।।


महिषासुर-मर्दिनी, हे अम्बे,
महिमा तेरी अपरंपार।
दिव्य तेजमय रूप तुम्हारा,
शक्ति-साहस का भंडार।
सुख-समृद्धि से महके जीवन,
मंगलमय हो माँ की करुणा से।
पुरुषार्थ सदा फलित, माँ कात्यायनी की उपासना से।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ