हे ईश्वर क्या है?

हे ईश्वर क्या है?

डॉ. मेधाव्रत शर्मा, डी•लिट•
(पूर्व यू.प्रोफेसर)
किसी की बात
कभी-कभी लगती है
हथौड़े की मानिंद कलेजे पर
कभी-कभी किसी की बात
दिखती तो है हथौड़े की तरह
मगर छोड़ती है असर
फूल की भाँति
कभी-कभी किसी की बात
भासती तो है फूल-जैसी
पर चोट करती है दिल पर
हथौड़े से ज्यादा,बहुत ज्यादा
दर्दनाक बेपनाह बेइंतहा सख़्त
और कभी किसी की बात
फूल ही फूल
अपनी मसृणता कोमलता माधुरी व सौरभ्य से
आप्यायित संप्लुत सुभग
कर देती है मन- प्राण-आत्मा को
किसी की बात पर
आती है रुलाई
किसी की बात पर
आती है हँसी
तो आती है हमदर्दी
किसी की बात पर
और किसी की बात
बंजर में खिला देती है
गुलाब ही गुलाब
हे ईश्वर !
कैसा है तुम्हारा सृष्टि-प्रपंच
चित्र-विचित्र
सपर्यय-विपर्यय
पहेली है,सम्मोहन है
निरा स्वच्छन्द क्रीड़ा है
या है ग्रन्थिल संजाल
विद्रूप-परिहास-उपहास का
क्या है? क्या है?? क्या है???
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