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अक्टूबर 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

अक्टूबर 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

लेखक:रवि शेखर सिन्हा उर्फ आचार्य मनमोहन।ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुण्डली विशेषज्ञ।
हर हर महादेव!!
मैं आप सबको और आप सबके हृदय में विराजमान ईश्वर को प्रणाम करता हूं और धन्यवाद करता हूं। अंग्रेजी कैलेंडर के अक्टूबर महीने में भारतीय सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन और कार्तिक का मिला-जुला महीना होता है। अश्विन का महीना दो भागों में विभक्त होता है। आश्विन कृष्ण पक्ष पितरों को समर्पित होता है। जबकि आश्विन शुक्ल पक्ष मां भगवती, मां जगदंबा, मां दुर्गा को समर्पित होता है। जबकि कार्तिक मास भगवान कार्तिकेय को समर्पित है और सूर्य भगवान का पूरे वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पर्व छठ पर्व के रूप में भगवान सूर्य और छठ माता को समर्पित होता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को 4 महीने की योग निद्रा के पश्चात जगत के पालनहार भगवान श्री हरि महा विष्णु योग निद्रा से बाहर आकर सृष्टि का कार्य भार संभालते हैं। जिसे देव उठानी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अश्विन मास और कार्तिक माह के देवी देवताओं को नमन करते हुए चलिए चर्चा आरंभ करते हैं अश्विन मास श्री विक्रम संवत 2083 के महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों के बारे में।

27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आश्विन कृष्ण पक्ष होगा। नवमी तिथि का क्षय हो जाने के कारण यह पक्ष 14 दिनों का ही होगा।

जबकि 11 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक आश्विन शुक्ल पक्ष होगा। षष्ठी तिथि की वृद्धि हो जाने के कारण यह पक्ष 16 दिनों का हो गया है।

2 अक्टूबर शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारतवर्ष के यशस्वी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जाएगी।

3 अक्टूबर शनिवार को महालक्ष्मी व्रत की समाप्ति होगी। आज जीवित्पुत्रिका व्रत है। राजा जीमूतवाहन और मां जगदंबा की विशेष पूजा अर्चना आज के दिन की जाती है। प्रदोष काल में जीवित्पुत्रिका माता की पूजा और कथा श्रवण करने का नियम है। आज माताएं अपनी संतान की दीर्घायु की मंगल कामना के साथ जीवित्पुत्रिका का निर्जला व्रत रखेंगी।

शास्त्रीय नियम के अनुसार सप्तमी अष्टमी युक्त व्रत करना शुभ नहीं माना जाता। किंतु इस वर्ष 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 से अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। जबकि 4 अक्टूबर को नवमी तिथि में सूर्योदय होने के कारण उदया तिथि में अष्टमी नहीं मिल रहा है। अतः अष्टमी तिथि के क्षय होने के कारण 3 अक्टूबर शनिवार को ही जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाएगा।

4 अक्टूबर रविवार की सुबह 5:51 तक अष्टमी तिथि रहेगी। उसके बाद पूरा दिन नवमी तिथि रहेगी। अतः जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण उत्तर और पूर्व भारत में, बिहार के पटना शहर में 4 अक्टूबर रविवार की सुबह 5:45 के बाद किया जाएगा।

जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में विशेष कर महाराष्ट्र मुंबई में जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 4 अक्टूबर रविवार की सुबह 6:32 के बाद किया जाएगा।



6 अक्टूबर मंगलवार को इंदिरा एकादशी का व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा होगा।



8 अक्टूबर गुरुवार को प्रदोष व्रत होगा। आज मासिक शिवरात्रि व्रत भी है।



10 अक्टूबर शनिवार को स्नान दान एवं श्राद्ध सहित सर्वपितृ अमावस्या, पितृ विसर्जन, महालया होगा। आज के दिन अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण करके ब्राह्मणों को चतुर्भुज श्री महा विष्णु का स्वरूप मानते हुए भोजन कराना एवं श्रद्धापूर्वक दान दक्षिणा देकर उनको संतुष्ट करना परिवार में सुख शांति प्रदान करता है। इससे वंश वृद्धि होती है। हर सनातन धर्मी को इस पुनीत कार्य को अवश्य करना चाहिए।



11 अक्टूबर रविवार से शारदीय नवरात्र आरंभ होगा आज इष्टि है। आज के दिन अपने घर में स्थापित देवी देवताओं की प्रतिमाओं को भोजन पकवान नैवेद्य भोग लगाया जाता है। आज महाराज अग्रसेन की जयंती भी है।

आज से प्रत्येक सनातनी के घर में, मंदिरों में और सार्वजनिक पांडालों में मां जगदंबा की पूजा अर्चना के निमित्त कलश स्थापन किया जाएगा। मां दुर्गा के जय घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।



12 अक्टूबर सोमवार को चंद्र दर्शन होगा।



14 अक्टूबर बुधवार को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।



15 अक्टूबर गुरुवार को उपांग ललिता का व्रत होगा यह व्रत महाराष्ट्र प्रांत में प्रसिद्ध है।



17 अक्टूबर शनिवार को दुर्गा पूजा पंडालों में मां जगदंबा की प्रतिमाओं की स्थापना होगी। माता सरस्वती का आवाहन किया जाएगा। आज महा सरस्वती की विशेष पूजा की जाएगी।

आज के ही दिन भगवान सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे। जिसे तुला संक्रांति के नाम से भी जानते हैं।



18 अक्टूबर रविवार को भानु सप्तमी है।



19 अक्टूबर सोमवार को श्री दुर्गा अष्टमी का व्रत होगा। नवमी तिथि संयुक्त होने के कारण महानवमी से संबंधित हवन, यज्ञ और कन्या पूजन भी आज के ही दिन किया जाएगा।



20 अक्टूबर मंगलवार को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। आज के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का जल विसर्जन किया जाएगा।

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा। मां दुर्गा के जय घोष और जय श्री राम के उद्घोष के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।



21 अक्टूबर बुधवार को माधवाचार्य जी की जयंती मनाई जाएगी।



22 अक्टूबर गुरुवार को पापांकुशा एकादशी का व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा।



काशी के नाटी इमली नामक स्थान पर आज राम भारत मिलाप की रामलीला, काशीराज की गौरवपूर्ण उपस्थिति एवं काशी के यादव बंधुओ की परंपरागत सहभागिता के साथ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न होगी।



23 अक्टूबर शुक्रवार को प्रदोष व्रत होगा। आज भगवान पद्मनाभ के नाम से पद्मनाभ द्वादशी भी मनाई जाएगी।



25 अक्टूबर रविवार को व्रत की पूर्णिमा होगी। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा कोजागिरी के नाम से भी यह दिन प्रसिद्ध है। आज के ही दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के संग रासलीला रचाई थी।

आज की रात शर्करा युक्त शुद्ध दूध से निर्मित खीर को पूर्ण चंद्रमा की अमृतोमय चांदनी में रख दिया जाता है एवं पूर्ण चंद्र की अमृत वर्षा से सिक्त खीर को प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि इस खीर में अनेकों रोगों के शमन की शक्ति होती है।

बंगाली समाज में इसे (लक्खी) लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है।

आज की रात माता लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है की शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था।आज माता श्री महालक्ष्मी का जन्मोत्सव भी श्रद्धा भक्तिपूर्वक मनाया जाता है।



26 अक्टूबर सोमवार को स्नान दान की पूर्णिमा है। आज महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती है। ज्योतिष विज्ञान के महान प्रवर्तक पराशर ऋषि का भी आज जन्मोत्सव मनाया जाएगा। ब्रजभूमि में आज रास पूर्णिमा मनाई जाएगी। आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रवेश कर जाने के कारण आज से ही कार्तिक स्नान यम नियम आरंभ हो जाएगा।



आज के दिन इष्टि है। घर के अंदर स्थापित देवी देवताओं की प्रतिमाओं को आज के दिन भोजन, पकवान, नैवेद्य अर्पित करने का नियम है।



27 अक्टूबर मंगलवार से कार्तिक माह आरंभ हो जाएगा।



29 अक्टूबर गुरुवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।

आज करवा चौथ का व्रत भी होगा। आज के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति के दीर्घ जीवन की कामना से दिनभर निर्जला रहकर करवा चौथ का व्रत रखती हैं और सायं काल चंद्रमा देवता को अर्घ्य अर्पित करके व्रत का पारण करती हैं। इसे ललिता चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।



विशेष टिप्पणी:

27 सितंबर रविवार की रात 4:50 पर भगवान सूर्य हस्त नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। जिसे आम बोलचाल की भाषा में हथिया नक्षत्र कहा जाता है। इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश करते हैं सामान्य से अधिक वर्षा होने के योग प्राप्त हो रहे हैं। 27 सितंबर से लेकर 11 अक्टूबर तक बहुत अच्छी वर्षा होने की संभावना है। बरसात की झड़ी लगी रहेगी। 11 अक्टूबर रविवार की शाम 5:16 पर भगवान सूर्य चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 18 अक्टूबर रविवार के दिन सुबह 10:26 पर भगवान सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। 24 अक्टूबर शनिवार की रात 2:55 पर भगवान सूर्य स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

13 अक्टूबर के आसपास वर्षा होने की विशेष संभावना है।

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*वर्ष 2026 शारदीय नवरात्र व्रत से संबंधित विशेष जानकारियां*



वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है और इसी दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाएगी।



पंचांग के अनुसार, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 09:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 09:30 बजे तक रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम से 11 अक्टूबर को ही नवरात्रि का पहला दिन और कलश स्थापना का विधान माना जाएगा।



*देवी भागवत के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में कलश स्थापना करना वर्जित होता है। यदि इस अशुभ योग में घट स्थापना किया जाए तो अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।*



11 अक्टूबर 2026 रविवार को रात के 10:32 तक चित्रा नक्षत्र है और रात्रि 9:05 तक वैधृति योग है। नियम के अनुसार पूरे दिन घटस्थापना का मुहूर्त नहीं मिल रहा है। शास्त्र के आदेश अनुसार यदि ऐसी स्थिति पैदा हो जाए तो अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ फलदायक होता है। अतः इस वर्ष शारदीय नवरात्र में 11 अक्टूबर 2026 रविवार के दिन घट स्थापना अर्थात कलश स्थापना का एकमात्र मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त ही प्राप्त हो रहा है। अतः अभिजीत मुहूर्त में ही घटस्थापना करना शुभ फलदायक होगा।



कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:



दिल्ली में...

अभिजीत मुहूर्त

समय: दोपहर 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।

कुल अवधि: 47 मिनट।



बिहार पटना में....

अभिजीत मुहूर्त

समय: दोपहर 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।

कुल अवधि: 47 मिनट।



मुंबई में.....

समय: दोपहर 12:02 बजे से 12:49 तक।

कुल अवधि: 47 मिनट।



वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है, जबकि उनका विसर्जन या प्रस्थान मुर्गे (चरणायुध) पर होगा। धार्मिक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है और इसका समापन मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी (दशहरा) के साथ होगा।



देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के प्रारंभ और समापन के दिन (वार) के आधार पर माता रानी के आगमन और प्रस्थान की सवारी तय होती है।



आगमन का वाहन - हाथी (शुभ संकेत):

चूंकि इस बार घटस्थापना रविवार को है, इसलिए मां दुर्गा का वाहन हाथी होगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद शुभ माना जाता है। हाथी पर माता का आना देश-दुनिया में सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, धन-धान्य की प्रचुरता और खुशहाली बढ़ने का प्रतीक है।



विसर्जन/विदाई का वाहन - मुर्गा (अशुभ संकेत):

इस साल विजयादशमी का त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, जब माता मंगलवार या शनिवार को विदा होती हैं, तो उनका वाहन मुर्गा (चरणायुध) होता है। माता रानी का मुर्गे पर प्रस्थान करना शुभ नहीं माना जाता है। यह समाज या प्रकृति में विकलता, राजनीतिक उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाओं या अकाल जैसे कष्टों की ओर इशारा करता है।

पंचांगीय गणना के अनुसार, इस बार षष्ठी तिथि की वृद्धि हो रही है।



तिथियों का संयोग कुछ इस तरह बन रहा है कि महाष्टमी का व्रत 19 अक्टूबर सोमवार को किया जाएगा।



19 अक्टूबर 2026, सोमवार को ही महाअष्टमी और महानवमी दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे।



तिथियों का समय इस प्रकार रहेगा:

अष्टमी तिथि: 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 08:27 बजे से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी।

नवमी तिथि: 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से शुरू हो जाएगी।चूँकि सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) का विशेष महत्व होता है, इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह महागौरी की पूजा (अष्टमी), कन्या पूजन और फिर नवमी के सभी धार्मिक अनुष्ठान व हवन संपन्न किए जाएंगे।

इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी।



विशेष जानकारी:

*जीवन रक्षक कुछ विशेष महाप्रयोग*

1.अगर आप यात्रा कर रहे हो अथवा कहीं भी हो और आसमान से जोरदार बिजलियों के चमकने और गरजने की आवाज सुनाई दे और ऐसा डर लगे कि कहीं बिजली आपके आसपास ना गिर जाए तो ऐसे में अगस्त्य ऋषि का नाम लेने से आसमान की बिजलियां भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।जब भी आसमानी बिजली से डर लगे उस समय अगस्त्य ऋषि का स्मरण करना चाहिए।*ऊं अगस्त्य ऋषियै नमः*ऊं अगस्त्य, अगस्त्य, अगस्त्य ऐसा बोलने से आसमानी बिजली भी शांत हो जाती है।



2.कफल्लक ऋषि और उनकी तीनों पत्नियों दाहिनी मोहिनी और सती का नाम लेकर जो व्यक्ति शयन करेगा, उसके घर में कभी भी चोरी नहीं होती है। चोर आकर भी खाली हाथ चले जाते हैं। यहां तक कि आप अगर बस में या ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं और सोने से पहले कफल्लक ऋषि और उनकी तीनों पत्नियों दाहिनी, मोहिनी और सती का नाम स्मरण करके सो जाएं तो आपका एक भी सामान चोरी नहीं होगा।



3. यदि घर के आसपास सांप निकलने लगे। घर के अंदर सांप आने लगे या किसी भी तरह से आपको सांपों से डर लगता हो अथवा आपके जीवन में कहीं से भी आपके आसपास सांप दिखने लगे हैं, रास्ते में आते-जाते आपको सांप दिखाई देने लगे हैं, सांपों से डर लगने लगे तो ऐसी स्थिति में आस्तिक मुनि का नाम लेने से सांप आपका कुछ नहीं बिगाड़ेंगे।

जब भी सांप दिखाई दे अथवा घर में सांप घुस जाए या कहीं भी सांप का भय हो तो उस समय सांपों के हमले से बचने के लिए *ऊं आस्तिक मुनये नमः* मंत्र का 5 या 11 बार जाप करने तो सांप आपका कुछ नहीं बिगाड़ेगा। चुपचाप अपना रास्ता बदल कर चला जाएगा।

इति शुभमस्तु!!
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