दिनकर ने कहा था- राजनीति जब जब लड़खड़ाएगी, साहित्य सँभालेगा

- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ भव्य कवि-सम्मेलन, १४ मनीषियों को दिया गया शिखर सम्मान
पटना, २३ सितम्बर। दिनकर ने कहा था- 'राजनीति जब-जब लड़खड़ाएगी, 'साहित्य' उसे संभाल लेगा।' राजनीति वालों को चाहिए कि वे सदा ही साहित्यवालों को ससम्मान अपने सबसे निकट रखें। क्योंकि उनको पतन से कोई अंग-रक्षक नहीं, 'साहित्यकार' बचाएगा।
यह बातें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में बुधवार को राष्ट्र-कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की जयंती पर आयोजित समारोह और कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि वर्ष १९५६ में सम्मेलन का रजत-जयंती समारोह दिनकर जी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ था, जिसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति देशरत्न डा राजेंद्र प्रसाद ने किया था और स्वागताध्यक्ष थे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबू श्रीकृष्ण सिंह। देशरत्न तो सम्मेलन के संस्थापकों में से ही एक थे किंतु श्रीबाबू भी हिन्दी के एक ऐसे सेवक थे कि वे सम्मेलन के सभी अधिवेशनों में उपस्थित रहते थे। मुख्यमंत्री रहते हुए भी, विना किसी पूर्व सूचना के सम्मेलन पहुँच जाते थे। पुस्तकालय में बैठ जाते थे। साहित्याकारों का हाल-चाल, दुःख-दर्द पूछ लेते थे। आज मंत्रियों से आग्रह करना पड़ता है। आज भारतीय राजनीति अबतक के सबसे पराभव के काल में है। इसे साहित्य रूपी दवा की सबसे अधिक आवश्यकता है।.jpeg)
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समारोह का उद्घाटन करते हुए, राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्त्ति संजय कुमार ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि जिस मंच से राष्ट्रकवि काव्य-पाठ करते थे, उस मंच से हमें बोलने का अवसर मिला है। दिनकर अपने ओज के काव्य और मूल्यवान गद्य के लिए अमर रहेंगे।
इस अवसर पर, इंस्टिच्युट ऑफ ऐकेडेमिक स्कौलर ट्रस्ट की ओर से १४ विदुषियों और विद्वानों;- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो अबु बकर रिज़वी, मौलाना मज़हरूल हक़ अरबी-फ़ारसी विश्व विद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो तौकीर आलम, एस एस कौलेज, एस एम डी कालेज, पुनपुन के प्राचार्य प्रो मधुरेंद्र, एम एम कालेज विक्रम की प्राचार्या प्रो विजय लक्ष्मी, नालंदा कौलेज, बिहार शरीफ़ की प्राचार्या प्रो सुनीता सिन्हा, द्वारिका कालेज, पटना की प्राचार्या प्रो सीता सिन्हा, महिला कालेज, कहगौल की प्राचार्या प्रो उषा विद्यार्थी, महाराज कालेज आरा की प्राचार्या प्रो कनक लता कुमारी, महिला कालेज, खगौल की बर्सर डा ख़ुशबू फ़ातिमा, वर्धमान महावीर महाविद्यालय, पावापुरी के प्राचार्य प्रो शैलेंद्र कुमार सिंह, डिग्री कालेज, दनियावां के प्राचार्य प्रो ख़ालिद अहमद, जी जे कालेज, बिहटा के बरसर डा मुकेश कुमार, के वी साइंस कालेज, बेनिपट्टी के प्राचार्य प्रो गजेंद्र प्रसाद गड़कर तथा गुरु गोविंद सिंह कालेज, पटनासिटी के बर्सर प्रो फ़ज़ल अहमद को 'ग्लोबल ऑब्जर्वर शिखर सम्मान' से विभूषित किया गया। अनिरुद्ध सिन्हा ने अंग-वस्त्रम, प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिन्ह और पुस्तकें देकर सम्मानित किया।

आरम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए, सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि दिनकर सत्य में ही अपने समय के सूर्य और साहित्य के गौरव-पुरुष थे। आग और राग के कवि दिनकर के गद्य भी काव्यमय है। संस्कृति के चार अध्याय में उनकी प्रतिभा की अनुभूति की जा सकती है।
मुख्य कार्यकारी और पत्रकार ए आर आज़ाद प्रो तौकीर आलम, प्रो अबु बकर, प्रो सीता सिन्हा तथा ए पी जे अब्दुल कलाम स्कूल, टाटा के निदेशक ताहिर हुसैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित कवि-गोष्ठी का आरंभ सुकंठी कवयित्री आराधना प्रसाद ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवि बच्चा ठाकुर, डा रत्नेश्वर सिंह, कृष्ण मोहन मिश्र, डा पुष्पा जमुआर, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, तनुजा सिन्हा, ईं अशोक कुमार, पं गणेश झा, सिद्धेश्वर, ईं आनन्द किशोर मिश्र, सदानन्द प्रसाद, डा नागेन्द्र शर्मा, इन्दु भूषण सहाय, अरुण कुमार श्रीवास्तव, श्रीकांत व्यास, सुनीता रंजन, इन्दु भूषण सहाय, शंकर शरण मधुकर, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, अभिराम बुद्धवाहा, सूरजदेव सिंह, डा प्रशांत कुमार, अर्चना भारती, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्त, राम गणित कुमार, ऋषभ राज, नन्दन कुमार, साकेत राज सिंह आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपने काव्य-पाठ से राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया। प्रवीर कुमार पंकज, वीरेंद्र यादव, अमृतनिधि समेत बड़ी संख्या में सुधीजन उपस्थित थे।
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