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अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल

अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल

कुमार महेंद्र
राष्ट्रवाद के अप्रतिम प्रणेता,
विचार आपके प्रखर रहे।
सत्य-सिद्धांतों की राहों पर,
स्वर आपके सदैव मुखर रहे।
सुशासन की संकल्पना से,
लोकतंत्र हुआ और सबल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


राजकाज को आदर्श बनाकर,
भारत की गरिमा बढ़ाई।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से आपने,
हिंदी की गौरव-ध्वजा चढ़ाई।
पोखरण की गर्जना से जग ने,
देखा भारत का तेज प्रबल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


काव्य-कला के कुशल साधक,
शब्दों में संवेदना थी।
हर पंक्ति में राष्ट्र-प्रेम की,
अद्भुत दिव्य चेतना थी।
सत्ता से ऊपर राष्ट्र रखा,
चरित्र रहा सदा उज्ज्वल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


जवान, किसान और विज्ञान को,
सदा दिया सम्मान महान।
विपक्ष में रहकर भी आपने,
लोकतंत्र का रखा मान।
मतभेदों में मनभेद न पाला,
राष्ट्रहित रहा सदा अविचल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


सत्ता आई, सत्ता चली गई,
आपके आदर्श अमर रहे।
राजनीति के धूमिल पथ पर,
आप सूर्य-से उज्ज्वल रहे।
जनसेवा को साध्य मानकर,
रहे सदैव सहज-सरल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


युग बदले, परिवेश बदलें,
बदलें राजनीति के पल।
पर आपके आदर्शों का दीपक,
जलता रहे सदा अविचल।
भारत माँ के गौरव-गगन में,
यश आपका रहे अविरल।
अटल जी, राजनीतिक नैतिकता में सदा रहे अटल।।


कुमार महेंद्र
स्वरचित मौलिक रचना
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