"अपना पथ, अपनी पहचान"
पंकज शर्माजीवन कोई छाया नहीं,
न उधार लिया विधान;
हर भोर नया प्रश्न लिए,
हर मन अपनी उड़ान।
कल में आज न खोजो तुम
अपने प्रश्नों के उत्तर;
अनुभव केवल दीप बने,
पथ हो अपना, दृष्टि प्रखर।
जो राह किसी की मंज़िल है,
वह तेरी हो—ज़रूरी नहीं;
हर यात्री की दिशा अलग,
हर यात्रा अधूरी नहीं।
ज्ञान जहाँ से मिले, ग्रहण करो,
पर विवेक रहे आधार;
भीड़ नहीं, अंतर्मन तय करे
जीवन का हर निर्णय-सार।
जब उत्तर भीतर खोजोगे,
मौन स्वयं बोल उठेगा;
मंज़िल से अधिक यात्रा में
चेतन मनुष्य जन्म लेगा।
अपना पथ स्वयं चुनना ही
जीवन का सच्चा मान;
दूसरों से आगे नहीं—
स्वयं से मिलना पहचान।
. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️"कमल की कलम से"✍️ (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
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