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प्रेम का बंधन

प्रेम का बंधन

संजय जैन

मुस्कारा कर जीना सीखो।
रोने-धोने की आदत छोड़ो।
जीवन की कला को समझो।
फिर प्यार से रहना सीखो।।
मुस्करा कर जीना सीखो।।

इक दिल था मेरे पास जो
अब बहक ने लगा है।
उम्मीदों से ज्यादा की वो
अब चाह रखने लगा है।
अब करें तो क्या करें
कुछ समझ नही आ रहा है।
इस दिल का हाल हम
अब किस को बताएँ।
मुस्करा कर जीना सीखो।।


जीता हूँ मैं अब बस
सिर्फ उनके लिए ही।
मौत से मुझे अब तो
डर लगता ही नही है।
दिन रात दुआ माँगें
बस ये दिल तेरे वास्ते।
कही आस्था का मेरा
ये भूत उतर न जाएँ।
मुस्करा कर जीना सीखो।।


मैं जब से तेरे प्यार में
दिवाना हुआ हूँ।
तेरी उम्मीदों पर मैं
खरा उतर रहा हूँ।
मेरे प्यार भरे सपने
कहीं टूट न जाएँ।
तेरी मेरी प्यारी दोस्ती
कही खुदसे न रूठ जाएँ।
मुस्करा कर जीना सीखो।।


अब तो मुझको तेरे पर
ज्यादा ही भरोसा है।
जिंदगी की सच्चाई का
मुझको अंदजा हुआ है।
मेरे तेरे दिल में अब
बस प्रेम उमड़ रहा है।
कही प्रेम का ये सागर
फिर से न सुख जाएँ।।
मुस्कारा कर जीना सीखो।
रोने-धोने की आदत छोड़ो।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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