"सशक्त महिला–समृद्ध बिहार" के धरातल पर उतारने की बड़ी पहल

पटना: । बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति ( बि आर एल पी एस -जीविका) द्वारा नव पदस्थापित प्रखंड स्तरीय जीविका कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से छह दिवसीय 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक शास्त्री नगर स्थित दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान में आयोजित किया गया। इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में बिहार के सभी जिलों से आए जिला प्रबंधकों और प्रशिक्षण अधिकारियों सहित कुल 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। औरंगाबाद जिले से ट्रेनिंग ऑफिसर प्रवीण कुमार पाठक सहित विभिन्न जिलों के विषय विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता रही।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत जीविका के निदेशक श्री राम निरंजन सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। अपने स्वागत सह उद्घाटन संबोधन में निदेशक महोदय ने कहा कि जीविका की जमीनी सफलता में प्रखंड स्तरीय कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नव पदस्थापित कर्मियों को दक्ष बनाने के लिए प्रशिक्षकों का मजबूत और कुशल होना आवश्यक है। उन्होंने सभी प्रशिक्षकों को निर्देश दिया कि वे प्रशिक्षण सत्रों के दौरान अर्जित ज्ञान और व्यवहारिक समझ को निचले स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाना सुनिश्चित करें।
छह दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण में राज्य कार्यालय के वरिष्ठ राज्य परियोजना प्रबंधकों (SPMs) एवं परियोजना प्रबंधकों द्वारा पी पी टी प्रस्तुतियों, केस स्टडीज, समूह चर्चाओं और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई: प्रथम दिवस (स्वरोजगार एवं आजीविका): रिसोर्स सेल, गैर-कृषि आजीविका और रोजगार पर गहन सत्र आयोजित किए गए। इसके अंतर्गत स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वयस्कों को सिखाने की प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों की जानकारी दी गई।।द्वितीय दिवस (क्षमता निर्माण एवं डेटा): संस्थागत क्षमता निर्माण , सतत् जीविकोपार्जन योजना तथा एम.आई.एस पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों को डेटा आधारित कार्यप्रणाली और संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने की व्यावहारिक समझ दी गई। तृतीय दिवस (महिला सशक्तिकरण व वित्तीय सुरक्षा): पशुधन, मत्स्य पालन, डेयरी विकास, जीवन व दुर्घटना बीमा, वैकल्पिक बैंकिंग व्यवस्था तथा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने और आजीविका संवर्द्धन के नए अवसरों को तलाशने पर विशेष जोर दिया गया।।चतुर्थ दिवस (वित्तीय समावेशन): माइक्रो फाइनेंस, कम्युनिटी फाइनेंस, कम्युनिटी इन्क्लूजन, प्रभावी संचार कौशल, सी जी एम और बुक्स ऑफ रिकॉर्ड्स के रखरखाव पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
पंचम दिवस (प्रशासनिक व सामाजिक पहलू): प्रोक्योरमेंट नीतियाँ, सी बी ओ प्रोक्योरमेंट, बिहार फाइनेंस रूल्स, पी एम एफ एम एस , एस एन स्पर्श, सी आई डी और सी आई एफ अकाउंट प्रबंधन के साथ-साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण (Nutrition), खाद्य समूह एवं मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन तंत्र को बारीकी से समझाया गया।।अंतिम दिन फार्म एवं नॉन-फार्म आजीविका, सामाजिक विकास गतिविधियों, मानव संसाधन प्रबंधन , कर्मियों की सेवा शर्तों, कार्य दायित्वों तथा संगठनात्मक व्यवस्थाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।संपूर्ण छह दिवसीय कार्यक्रम का सुचारू एवं प्रभावी समन्वय ह्यूमन रिसोर्स (HR) थीम की परियोजना प्रबंधक सुश्री अनुमेहा स्वरूप द्वारा किया गया। उनके कुशल प्रबंधन के चलते सभी विषयगत सत्र समयबद्ध और परिणामोन्मुखी रहे। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह उन्मुखीकरण उन्हें फील्ड में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और नव पदस्थापित कर्मियों को बेहतर मार्गदर्शन देने में पूरी तरह सक्षम बनाएगा। यह आयोजन जीविका के मूल मंत्र "सशक्त महिला–समृद्ध बिहार" के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा।
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