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'मुक्त-छंद' के प्रथम कवि और 'बिहार-आंदोलन' के जनक थे बाबू महेश नारायण

'मुक्त-छंद' के प्रथम कवि और 'बिहार-आंदोलन' के जनक थे बाबू महेश नारायण

  • हिन्दी के महान उन्नायक थे मैथिली शरण गुप्त, आदर्श की संज्ञा थे महाकवि रामदयाल पाण्डेय
  • साहित्य सम्मेलन में तीनों विभूतियों की मनाई गई जयंती, ७२वें जन्म-दिवस पर बिन्देश्वर गुप्ता हुए सम्मानित

पटना, ६ अगस्त। हिन्दी काव्य-साहित्य में मुक्त-छंद के प्रथम कवि और बिहार-आंदोलन के जनक थे बाबू महेश नारायण। बिहार में हिन्दी-पत्रकारिता के भी पितामह थे महेश बाबू। बिहार को एक अलग राज्य बनाया जाए, इस हेतु प्रथम संकल्प उनके ही मन में आया था। 'बिहार टाइम्स' नामक पत्र निकालकर उन्होंने इस आंदोलन को बल प्रदान किया। उनके निधन के पश्चात इस आंदोलन को, उनके सहयोगी डा सच्चिदानन्द सिन्हा ने सफल नेतृत्व दिया और 'बिहार' राज्य का निर्माण हुआ।

यह बातें गुरुवार की संध्या, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित जयंती समारोह एवं कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। महाकवि मैथिली शरण गुप्त को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा 'राष्ट्र-कवि'की उपाधि से विभूषित और भारत सरकार के पद्म-भूषण सम्मान से अलंकृत गुप्त जी, नव विकसित खड़ी बोली का नाम 'हिन्दी' के स्थान पर 'भारती' रखने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि, क्योंकि यह 'भारत' की भाषा है, इसलिए इसका नाम 'भारती' ही होना चाहिए। गुप्त जी जीवन-पर्यन्त भारत और भारती के गीत गाते रहे और यह प्रार्थना करते रहे कि "मानस-भवन में आर्यजन जिसकी उतारें आरती/ भगवान ! भारतवर्ष में गूँजे हमारी भारती"। वे खड़ी बोली के उन्नायकों में मूर्द्धन्य और 'साकेत' खंड-काव्य के रूप में रामकथा लिखने वाले हिन्दी के प्रथम कवि हैं।

डा सुलभ ने कहा कि महाकवि रामदयाल पाण्डेय स्वाभिमान, आदर्श और राष्ट्र-भक्ति की संज्ञा थे। वे एक महान स्वतंत्रता-सेनानी, ओजस्वी वक्ता, राष्ट्रीय भाव के अमर-कवि हैं। वे साहित्य सम्मेलन के सबसे बड़े सेवकों में थे। चार बार सम्मेलन के अध्यक्ष चुने गए। सम्मेलन भवन के निर्माण में अपने सिर पर ईंट-गारे ढोए और अन्य साहित्यकारों को भी इस हेतु प्रेरित किया। स्वतंत्रता-सेनानी पेंशन लेने से यह कह कर इनकार कर दिया कि, "भारत माता की सेवा पुत्र की भाँति की, किसी कर्मचारी की तरह नहीं, कि सेवा-शुल्क लूँ।"

डा सुलभ ने कवि-पत्रकार बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता को भी उनके ७२वें जन्म-दिवस पर अंग-वस्त्रम और पुष्प-हार से सम्मानित किया। वरिष्ठ साहित्यकार डा रत्नेश्वर सिंह, डा शशि भूषण सिंह, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी तथा शम्भुनाथ पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र की वाणी वंदना से हुआ। वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, डा पूनम आनन्द, शमा कौसर 'शमा', डा ओम् प्रकाश पाण्डेय, सदानन्द प्रसाद, ईं अशोक कुमार, विभारानी श्रीवास्तव, रजनीश कुमार गौरव, इंदुभूषण सहाय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय तथा अश्विनी कविराज ने काव्य-पाठ किया।

अतिथियों का स्वागत कुमार अनुपम ने, मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

वरिष्ठ व्यंग्यकार बाँके बिहारी साव, प्रवीर कुमार पंकज, विजय कुमार सिंह, गीता प्रसाद, सोहिनी प्रिया, मोहिनी प्रिया, प्रेम प्रकाश, सौम्या कुमारी, अभिराम आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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