तुम ही हो
संजय जैनतेरी आँखों में मुझे
आँसू नही चाहिए।
तेरे होंठो पर मुझे
सदा मुस्कान चाहिए।
देख सकता हूँ मैं
सब कुछ दुनिया में।
पर तेरी उदासी को
नही देख सकता हूँ।।
दूर से ही तेरा एहसास है
हर सांस में तेरा वास है।
कैसे तुझे भूल सकता हूँ
मेरा जीवन तेरा कर्जदार है।
तेरी खुशी में एक राज है
जो जीने की राह दिखता है।
इसलिए बिना साथ के भी
तेरा साथ मिल रहा है।।
फूल बहुत खिल रहे है
पर खुशबू की कमी है।
जो तेरे होने से रहती थी
पर आज उसकी कमी है।
वर्षो पहले दिया फूल
आज भी महक रहा है।
जिसका नशा आज भी
दिल दिमाग पर चढ़ा है।।
तेरे से शुरू हुआ था
तेरे पर ही अंत होगा।
जीने मरने की कसमें
आज भी जिंदा है।
इसलिए दूर होकर भी
दोनों बहुत पास है।
भले ही राहे बदली है
पर जान तुझे पर अटकी है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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