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विवाह की चिंता

विवाह की चिंता

संजय जैन
आज कल की बड़ी समस्या
का वर्णन मैं करता हूँ।
घर-घर की परेशानीयों का
जिक्र आज मैं करता हूँ।
पहले और आज के युग में
अंतर बहुत झलकता है।
इसलिए विवाहिक बंधन का
डर सबको ज्यादा लगता है।।


बेटा-बेटी वाली सब लोग
विवाह के लिए चिंति है।
सुयोग्य वर-वधू की चिंता में
माँ बाप परेशान ज्यादा है।
वैसे तो बदला है माहौल
कलयुग के समाज का देखो।
जिसमें बेटीयों का स्तर ऊपर है
और गिरता स्तर बेटों का है।।
आज कल की बड़ी समस्या..।।


बेटा का विवाह होने पर भी
माँ-बाप की चिंता कम नही।
कलयुग में जो खेल चल रहा
सबसे ज्यादा उनसे परेशानी है।
नई नबेलि दुल्हन बनकर
घर में जो बहू आई है।
उसने ही घर परिवार की
सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है।।
आज कल की बड़ी समस्या..।।


विवाहिक जीवन आज के युग में
सात जन्मों का बंधन नही।
पहले जैसी विवाहिक जीवन
अब इस युग में संभव नही।
पहले बारे के व्यवहार से ही
सबको अंदाज लग जाता है।
इनका दम्पितमय जीवन आगे
चलना और क्या बिखरना है।।
आज कल की बड़ी समस्या..।।


ज्यादा लाड़ प्यार लूटा दिया
यदि बेटा और परिवार वालों ने।
तो घर की हालत बिगड़ेंगे
या आगे अच्छे से चलेंगे।
यह तो नई दुल्हन पर ही
पूरी तरह निर्भय करेगा।
इसलिए सामंजस्य का व्यवहार ही
शान बढ़ायेगा घर परिवार की।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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