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महंत की नृशंस हत्या पर संत समाज में उबाल, संत सुरक्षा कानून बनाने की उठी मांग

महंत की नृशंस हत्या पर संत समाज में उबाल, संत सुरक्षा कानून बनाने की उठी मांग

  • अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच ने प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की अपील

पीठाधीश्वर स्वामी श्यामानंद जी महाराज
पटना, संवाददाता। राजस्थान के कोटा स्थित लगभग 1100 वर्ष प्राचीन चंद्रसेल मठ के महंत देवानंद की निर्मम हत्या को लेकर देशभर के संतों, महंतों और सनातन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच ने केंद्र सरकार से देश में संतों एवं धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष “संत सुरक्षा कानून” लागू करने की मांग की है।

अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के राष्ट्रीय महासचिव एवं श्री गौरी शंकर बैकुंठ धाम न्यास समिति, खुसरूपुर-बैकटपुर के कोषाध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. श्यामानंद जी महाराज ने इस घटना को न केवल एक संत की हत्या, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा पर हमला बताया है। उन्होंने कहा कि महंत देवानंद की हत्या ने संपूर्ण संत समाज और करोड़ों सनातन अनुयायियों को झकझोर कर रख दिया है।

स्वामी श्यामानंद जी महाराज ने बताया कि कोटा में जिस अस्पताल में महंत देवानंद का पार्थिव शरीर रखा गया है, उसके बाहर बड़ी संख्या में संत, महंत एवं स्थानीय ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनरत संतों का कहना है कि जब तक हत्या के दोषियों को कठोरतम दंड नहीं दिया जाता और मामले का पूर्ण खुलासा नहीं होता, तब तक वे महंत का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
सोते समय किया गया हमला

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात कुछ अज्ञात अपराधी चंद्रसेल मठ में घुस गए और सो रहे महंत देवानंद पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जाता है कि हमलावरों ने उन पर लगभग 26 बार वार किए, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। हालांकि हत्या के पीछे की वास्तविक साजिश, उद्देश्य और शामिल अन्य लोगों के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस कारण संत समाज में रोष और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
संतों की सुरक्षा पर उठे गंभीर प्रश्न

स्वामी श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में संतों, महंतों और धार्मिक प्रतिष्ठानों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसी परिस्थितियों में साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संत समाज राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जागरण, आध्यात्मिक उन्नयन और सांस्कृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। उन्होंने मांग की कि संतों, आश्रमों, मठों और मंदिरों की सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी प्रावधान बनाए जाएं तथा संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
प्रधानमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

पीठाधीश्वर स्वामी श्यामानंद जी महाराज ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच की ओर से प्रधानमंत्री Narendra Modi को एक विस्तृत पत्र भेजा गया है। पत्र में महंत देवानंद की हत्या की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर दंड दिलाने तथा देश में संत सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि मंच के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद गिरि जी महाराज को भी इस विषय में अवगत कराया गया है तथा देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने का अनुरोध किया गया है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार संत समाज की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाती है तो निकट भविष्य में देशभर में व्यापक जनजागरण और आंदोलन चलाया जाएगा। मंच का कहना है कि यह केवल एक महंत की हत्या का मामला नहीं, बल्कि संत परंपरा की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।

संत समाज ने केंद्र एवं राजस्थान सरकार से इस मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों को कठोरतम दंड देने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और समाज में न्याय एवं सुरक्षा का विश्वास बना रहे।यह संस्करण समाचार पत्र, वेब पोर्टल या दिव्य रश्मि न्यूज़ में प्रकाशन हेतु उपयुक्त है।
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