मोटर गाडी घोडा बंगला
पापा को समर्पितप्रोफेसर डाक्टर सुधा सिन्हा , हिन्दी काव्य शिरोमणि
मोटर गाडी घोडा बंगला,
हीरा मोती चांदी सोना,
सबकुछ हमें तो मिल जाता,
जीवन दौलत से भर जाता,
सम्मान भी बेशुमार मिलता ,
पापा का प्यार नहीं मिलता।
ये करो ये ना करो,
सीमा से हम तो बंध जाते,
नैतिकता कापाठ पढा कर ,
जीवन खुशियों से सजाते।
प्यार भी हमें बहुत मिलता,
वैसा दुलार नहीं मिलता ।
मम्मी कहती ब्याह अब करो,
पापा कहे पढते जाओ,
ऊची ऊंची डिग्री दिलाकर ,
जीवन को रौशन करते ,
संसार में सबकुछ मिल जाता,
वैसा बिचार नही मिलता।
घर आने मे देर होती,
पगडंडी पर टहला करते ,
सूनी सडकों को नजर उठाकर,
बार बार देखा करते,
इन्तजार हमें बहुत मिलता ,पर प्यार रसधार नहीं मिलता।,
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