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शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता "सत्यम् शिवम् सुंदरम्" में डॉ. सुनीता सैनी के मनभावन लोकगीत सुन आनंदित हुए श्रोता

शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता "सत्यम् शिवम् सुंदरम्" में डॉ. सुनीता सैनी के मनभावन लोकगीत सुन आनंदित हुए श्रोता

  • समाज में समरसता एवं सौहार्द बनाए रखने में साहित्य की भूमिका पर हुई बातचीत
  • इक अठन्नी ही दे दे मोरी माँ, मैं पानी पूरी खाऊँगी

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' की साहित्यिक भेंटवार्ता 'सत्यम् शिवम् सुंदरम्' में शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष लोकगीतकार डॉ सुनीता सैनी गुड्डी ने अपने साहित्यिक अनुभव एवं विचार साझा किये, सुमधुर गीत सुनाए। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ सैनी ने स्वरचित सरस्वती वंदना "माँ मुझको भी दे दो ज्ञान" की सुमधुर प्रस्तुति से किया। वार्ताकार व शब्दवीणा की जमशेदपुर जिला अध्यक्ष कवयित्री पूनम शर्मा स्नेहिल ने डॉ सैनी का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय देते हुए उनसे उनकी पसंदीदा लेखन शैली, रुचिप्रद लेखन विधा, एवं लोकगीतों के लिए उनके द्वारा चयनित प्रमुख विषयों पर अनेक रोचक प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। उन्होंने डॉ. सैनी, श्रीमती स्नेहिल एवं सभी दर्शकों व श्रोताओं का कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत किया।

भेंटवार्ता में श्रीमती स्नेहिल के प्रश्नों का उत्तर देती हुईं सुनीता सैनी ने कहा कि रचनाकारों को भीड़ का हिस्सा न बनकर कुछ न कुछ नया लिखते रहना चाहिए। कुछ भी लिखने के पहले उसकी लोकोपयोगिता पर विचार-मंथन अवश्य ही कर लेना चाहिए। समाज में समरसता एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने में साहित्य की अहम भूमिका पर बातचीत हुई। डॉ. सैनी ने "इक अठन्नी ही दे दे मोरी माँ, मैं पानी पूरी खाऊँगी" एवं "चोरी हो गया मेरा फोन" जैसे मनभावन लोकगीत सुनाए। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर महावीर सिंह वीर, पुरुषोत्तम तिवारी, सुरेश विद्यार्थी, राम नाथ बेख़बर, विजयेन्द्र सैनी, सरोज कुमार, बबन बदिया, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, डॉ विजय शंकर, दीपक कुमार, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, अनिल कुमार, प्यारचन्द कुमार मोहन, डॉ रवि प्रकाश, संतोष कुमार जयंत, धर्मवीर लोहिया, सत्य किंग, डॉ रश्मि प्रियदर्शनी सहित अनेक साहित्यानुरागियों ने कार्यक्रम का आनंद उठाया। साथ ही, अपनी टिप्पणियों द्वारा साहित्यिक भेंटवार्ता को जीवंत बनाए रखा।

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