"संग्रह और विसर्जन का संतुलन"
पंकज शर्मा
ज्ञान मनुष्य के जीवन में प्रकाश का प्रथम स्रोत है। वह हमें प्रतिदिन नए विचार, अनुभव एवं सत्य प्रदान करता है। जितना अधिक हम सीखते हैं, उतना ही संसार के रहस्यों एवं संभावनाओं से परिचित होते जाते हैं। ज्ञान का स्वभाव संग्रह करना है—वह हमारी चेतना में तथ्यों, अनुभवों एवं समझ की नई परतें जोड़ता है। इसी संचय से व्यक्तित्व का विस्तार होता है एवं जीवन को दिशा प्राप्त होती है।
मित्रों किन्तु बुद्धिमत्ता ज्ञान से भी आगे की अवस्था है। वह केवल यह नहीं सिखाती कि क्या ग्रहण करना है, बल्कि यह भी बताती है कि क्या त्याग देना आवश्यक है। अहंकार, पूर्वाग्रह, भय एवं अनावश्यक आसक्तियों का विसर्जन ही अंततः आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। ज्ञान मन को समृद्ध बनाता है, जबकि बुद्धिमत्ता आत्मा को मुक्त करती है। जीवन की पूर्णता इसी संतुलन में निहित है कि हम विवेकपूर्वक ग्रहण करें एवं साहसपूर्वक छोड़ना भी सीखें।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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