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"गुरु : पंखों का स्पर्श"

"गुरु : पंखों का स्पर्श"

 पंकज शर्मा
गुरु का कार्य केवल ज्ञान का संचय कराना नहीं, बल्कि चेतना को जागृत करना है। जो गुरु शिष्य को तथ्यों और उपदेशों के बोझ तले दबा देता है, वह उसकी जिज्ञासा की स्वाभाविक उड़ान को सीमित कर देता है। इसके विपरीत, सच्चा गुरु शिष्य के भीतर निहित संभावनाओं पर विश्वास जगाता है। वह उत्तर नहीं देता, अपितु प्रश्न करने का साहस देता है; वह मार्ग नहीं बनाता, बल्कि चलने की प्रेरणा देता है।

जीवन में सबसे प्रभावशाली शिक्षण वही है, जो आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित करे। महान गुरु अपने व्यक्तित्व की छाया नहीं फैलाते, बल्कि शिष्य को उसके स्वयं के आकाश से परिचित कराते हैं। जब मनुष्य अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान लेता है, तब उपलब्धियाँ बाहरी अनुग्रह नहीं, बल्कि आत्मबोध की स्वाभाविक परिणति बन जाती हैं। यही शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य है और यही गुरु की वास्तविक महिमा।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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