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पता ही नही चला

पता ही नही चला

संजय जैन

मिलते जुलते रहने से ही
दिल किसी ने चुरा लिया।
मुँह से तो कुछ उन्होंने
कुछ कभी नही बोला।।
मिलते जुलते रहने से ही..।।


बचपन से हम साथ खेले
साथ जवानी में पढ़े लिखे।
लड़ते झगड़ते खूब रहे हम
पर दिलसे दूर नही हुए।
खट्टी-मिठी बातें को भी
मिल जुलकर सुलझा लिए।
मिलते जुलते रहने से ही
दिल किसी ने चुरा लिया।।


जब भी तकरार हुई हमारी
पर शब्दों की मर्यादा रखी।
जिसके कारण ही हमारी
दोस्ती अब तक बची रही।
दिलसे दिलको प्यार करते
इसलिए हम साथ साथ है।
मिलते जुलते रहने से ही
दिल किसी ने चुरा लिया।।


आज हमारी जोड़ी सबसे
प्यारी और निराली है।
राधा-कृष्ण की उपमा देकर
चर्चा अक्सर करते है।
प्यार हमारा बचपन का है
इसलिए अमर जो हो रहा।
मिलते जुलते रहने से ही
दिल किसी ने चुरा लिया।
मुँह से तो कुछ उन्होंने
कुछ कभी नही बोला।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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