Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

ज्येष्ठ मास महात्मय {दसवां अध्याय}

ज्येष्ठ मास महात्मय {दसवां अध्याय}

आनन्द हठीला
स्कन्द जी बोले कि हे ऋपि लोग ! इस ज्येष्ठ मास के आने पर विष्णु भगवान् के मन्दिर से दशहरा व्रत करना चाहिये और प्रतिपत् से लेकर दशमी पर्यन्त तिथियों में भागीरथी (गङ्गा) जी के जल में स्नान करना चाहिये ॥ १ ॥

ऋपि लोग बोले कि हे स्कन्द जी ! इस व्रत का दशहरा नाम क्यों हुआ ? और प्रतिपत् तिथि में स्नान क्यों करना ? तथा ज्येष्ठ मास में व्रत क्यों करना ? यह सन मुझसे विस्तारपूर्वक कहिये ॥ २ ॥

स्कन्द जी नोले कि हे ऋपि लोग ! ज्येष्ठ मास, शुक्लपक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, गर करण, आनन्द योग, व्यतीपात योग. कन्या राशि के चन्द्रमा और वृपराशि के सूर्य होने ५२ ॥ ३॥


स्नान दान पूजन आदि करने मे मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में विविध भोगों को भोगकर अन्त (मृत्यु) होने पर विष्णुलोक को जाता है ॥४॥


अन्याय से पराये द्रव्य का हरना, अशास्त्रीय (शास्त्र विरुद्ध) हिंसा करना, पराई स्त्री से मैथुन करना, यह तीन प्रकार का अशुभ फलदायक कायिक कर्म कहाता है ॥ ५ ॥


कठोर वचन बोलना, झूठ बोलना, मुह पीछे किसीका दोप कहना, राजा की देश की पुर की निष्प्रयोजन बेमतलब की बातों का कहना, ऐसे चार (४) प्रकार का अशुभफल देने वाला वाचिक कर्म कहा है ।॥ ६ ॥


पराये धन को अन्याय से ग्रहण करूँगा ऐसा चिन्तवन करना, दूसरे के अनिष्ट की इच्छा करना, परलोक नहीं है देह ही आत्मा हैं ऐसे मिथ्या अभिनिवेश करना, ये तीन प्रकार का मानस पाप कर्म कहा जाता है ।॥ ७ ॥


ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन दर्शन स्पर्श मञ्जन पान अर्चन आदि करने से ऊपर कहे गये दशविध पापों का नाश हो जाता है, इसीलिये पूर्वदर्शी सुनियो ने इसका दशहरा नाम कहा है ॥ ८ ॥


और ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन स्नानमात्र से ब्रह्महत्या के समान दश जन्मों के अर्जित पापों से मुक्त हो जाता है, इसलिये इसका दशहरा नाम हुआ ॥ ९ ॥


दशहरा के दिन इन पुरातन मन्त्रों से श्री गङ्गा जी का यत्नपूर्वक पूजन करे। मन्त्र का अर्थ - शिवा को नमस्कार है, शान्ता को और नारायणी को नमस्कार है ॥ १० ॥


दशविध पापों को नाश करने वाली को और गङ्गा जी को नमस्कार है। उसी स्थान में महान् ओजस्वी दश (१०) देवताओं का पूजन करे ॥ ११ ॥


दश देवताओं के नाम - नारायण, महेश, ब्रह्मा, भास्कर (सूर्य), भगीरथ, हिमवान्, स्कन्द गणनायक (गणेश) ॥१२॥


चण्डी, सोम, इनका अपनी शक्ति के अनुसार पुजन कर दश फलों से पृथक् पृथक् पूजन करे ॥ १३ ॥


दश पसर तिल दश ब्राह्मणों को देकर 'गङ्गायै सर्वरूपिण्यै नमः' इस मन्त्र से पूजन करे ।॥ १४ ॥


और सतुआ का दश पिण्ड बनाकर जल में छोड़े तथा स्वशक्ति से गुड़ के दश पिण्डों को देवे ॥१५॥


यथाशक्ति सुवर्ण का मत्स्य, कच्छप, मण्डूक, शिशुमार आदि बनाकर अथवा चाँदी का अथवा अन्य धातु का बनाकर ॥ १६ ॥


अथवा पिसान का बनाकर पूजन करे और उनको जल मे छोड़ देवे । बाद दश सेर तिल, ब्रीहि (धान्य) और यव ब्राह्मणों को देवे ॥ १७ ॥


तथा ब्राह्मणों को यथाविधि दश गौ का दान कर देवे। इस विधान से वित्तशाढ्य (धन की शठता) का त्याग कर पूजन दान करे ॥ १८ ॥


और पक्वान्न पायस का भोजन ब्राह्मणो को करावे तो दश जन्म के अर्जित पापों से मुक्त हो जाता है, इसमे संशय नहीं है ॥ १९ ॥


ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपत् तिथि से लेकर 'दशमी पर्यन्त तिथियों में दशाश्वमेध तीर्थ मे स्नान करने से समस्त पापों से छूट जाता है ॥ २० ॥


ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपत् तिथि से लेकर प्रतिजन्म के पापों का नाश करने वाली दशमी तिथि पर्यन्त सभी तिथियों में क्रम से स्नान करने वाला मनुष्यों में श्रेष्ठ होता है ॥ २१ ॥


और दशहरा के दिन दशाश्वमेधेश्वर के लिङ्ग का दर्शन करने से दश जन्म के अर्जित पापों का नाश हो जाता है, इसमें संशय नहीं है ॥ २२ ॥


और दशयोगा नाम से इसकी प्रसिद्धि है। दशमी के दिन दैववश किसी समय दश योगों का सम्बन्ध हो अथवा न हो, अकेला ज्येष्ठ मास 'ही सर्वश्रेष्ठ है ॥ २३ ॥


समस्त योगों से रहित होने पर भी केवल ज्येष्ठ मास ही निश्चय रूप से फलों से पूर्ण मनोरथ करने वाला होता है ऐसा समझे ॥ २४ ॥


जैसे आकाश में नक्षत्रगणों के साथ चन्द्रमा शोभित होता है वैसे ही योगों के साथ ज्येष्ठ मास शोभित होता है। केवल योग शोभित नहीं होते है ।॥ २५ ॥


विना ज्येष्ठ मास के एकत्रित समस्त योग निष्फल होते है, इसमें संशय नहीं है ।। २६ ।।


इति श्री भविष्यपुराणे ज्येष्ठमासमाहात्म्ये सनाढ्यवंशोद्भव-व्याकरणाचार्य 'विद्यारत्न' पं० माधवप्रसादव्यासेन कृतायां भापाटीकायां दशमोऽध्यायः ॥ १० ॥


क्रमशः...〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ