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रेल यात्रा

रेल यात्रा

संजय जैन
आज मुंबई से भोपाल की 
2153 रेल से यात्रा हमनें की। 
वातानुकूल शयन कक्ष में 
टिकट हमारा था बुक। 
किराया तो भर पूर लिया 
भारतीय रेल मंत्रालाय ने। 
पर सुविधाएं देने आदि में
रेल प्रशासन एक दम शून्य।। 

डिब्बे में पानी नही 
न ही शौचालय साफ। 
कक्रोच और चूहा घूम रहे
एक दम से वो विंदास। 
कचरा और डाइफर की 
तो थी पूरी भर मार। 
साफ सफाई के नाम पर 
रेल विभाग था पूरा शून्य।। 

माना गलती यात्रियों की भी है
रखना चाहिए साफ सफाई का ध्यान। 
पर सबसे बड़ी गलती तो 
रेल्वे की ही मानी जायेगी।
क्यों नही करवाते समय पर
डिब्बों आदि की साफ सफाई।
जबकि स्वच्छ भारत का सपना
भारत सरकार का बड़ा मिशन है।। 

चादर तकिया कंबल का तो
बहुत बुरा था हाल आज। 
क्या इसके लिए भी 
रेल यात्री ही है जिम्मेदार। 
कब जागेगा रेल प्रशासन 
और अपनी जिमेम्दारी निभायेगा। 
या यात्रियों को लूटना ही
अब उसका है काम बचा।। 

बात करते है पेंटीकार वालों की
हाकरो के पास रेट लिस्ट नही। 
चाय की मात्रा क्वालाटी को देखो
जैसे दो घूँट गर्म पानी दिया। 
मन माने पैसे लेकर भी 
चीज कहाँ अच्छी देते है। 
पूछने पर वो लोग भी यारों
दोष सारा रेल्वे को देते।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई

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