भैरहवा, लुंबिनी में “हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी” संपन्न

- सनातन मूल्यों की रक्षा एवं भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता पर हुआ मंथन
नेपाल के लुंबिनी जिला स्थित भैरहवा में नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के सभागार में एक भव्य “हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी” का आयोजन किया गया, जिसमें भारत और नेपाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक एकता को सशक्त बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक जगत से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का आयोजन पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के कृपापात्र शिष्य एवं “विश्व ब्राह्मण भूषण” से सम्मानित अधिवक्ता प्रेमचंद झा जी के सानिध्य में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में अधिवक्ता प्रेमचंद झा ने सनातन धर्म के मान-बिंदुओं की रक्षा हेतु गोवर्धन मठ पुरी द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत और नेपाल दोनों देशों के समक्ष सांस्कृतिक एवं धार्मिक मूल्यों को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है, जिसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को संगठित होकर कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि “नेपाल केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की आत्मा है। यदि नेपाल सुरक्षित एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त रहेगा तो भारत भी सुरक्षित रहेगा। विश्व शांति एवं मानव कल्याण के लिए भारत और नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करना समय की आवश्यकता है।”
अधिवक्ता झा ने लोगों से आह्वान किया कि “भव्य नेपाल” और “भव्य भारत” के निर्माण हेतु सेवा, स्वाध्याय, सत्संग एवं संगोष्ठियों के माध्यम से प्रत्येक परिवार को जोड़ने का अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता, सह-अस्तित्व एवं विश्वबंधुत्व का संदेश देती है।
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कार्यक्रम में नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री कृष्णा प्रसाद शर्मा ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है, जिसे और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों एवं धार्मिक चेतना को बढ़ाने पर बल दिया।
नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, लुंबिनी प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर कुमार श्रेष्ठ ने अपने संबोधन में कहा कि नेपाल की पहचान सनातन संस्कृति से रही है और इसे सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि समाज में धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से युवाओं को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
संगोष्ठी में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति तथा भारत-नेपाल के आध्यात्मिक संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने गोवर्धन मठ पुरी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियान को समर्थन देने का आश्वासन दिया और समाज में धार्मिक चेतना जागृत करने हेतु निरंतर कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
कार्यक्रम की शुरुआत भैरहवा भजन टोली द्वारा प्रस्तुत गुरु वंदना एवं भक्ति गीतों से हुई, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

इस संगोष्ठी के सफल आयोजन में कार्यक्रम संयोजक अंकित शर्मा सहित आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
संगोष्ठी ने भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक एकात्मता, सनातन मूल्यों की रक्षा तथा समाज में धार्मिक चेतना जागृत करने के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का कार्य किया।
हर हर महादेव!
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