राज्यपाल ने बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में भाग लिया

पटना 22 मई, 2026:- माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने अधिवेशन भवन, पटना में आयोजित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पशु विज्ञान भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, पोषण तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की आधारशिला है।
उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों, पदक विजेताओं, शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और त्याग का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों के माता-पिता एवं शिक्षकों के योगदान की भी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में पशु विज्ञान एवं पशुपालन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में पशुधन ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा, सम्मान एवं आय का प्रमुख आधार है। दूध, अंडे, मांस और मछली जैसे उत्पाद पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार तक सीमित न रहकर उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक को सहज रूप से अपनाने में सक्षम है और आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन तथा नवाचार के माध्यम से पशु विज्ञान के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ विकसित की जा सकती हैं।
उन्होंने बिहार में संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में डेयरी विकास, मत्स्य पालन, बकरी पालन एवं अन्य संबद्ध क्षेत्रों में अपार अवसर उपलब्ध हैं। बिहार के पास उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधन तथा मेहनती मानव संसाधन मौजूद हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
राज्यपाल ने कहा कि आज सबसे बड़ी आवश्यकता केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि आधुनिकीकरण, मूल्य संवर्धन, कोल्ड-चेन अवसंरचना, बेहतर पशु चिकित्सा सेवाओं, वैज्ञानिक प्रजनन और बाज़ार से जुड़ाव को मजबूत करने की है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की कि वे शोध प्रयोगशालाओं को गाँवों और किसानों से जोड़ते हुए नवाचार के
केंद्र बने।

उन्होंने “वन हेल्थ” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, वनस्पति स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जलवायु परिवर्तन और बदलते रोग-परिदृश्य के बीच पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान के विशेषज्ञ सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी डिग्री उन्हें पेशेवर योग्यता देने के अलावा समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व भी सौंपती है। भारत का भविष्य केवल शहरी विकास और डिजिटल तकनीक पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक कृषि और सतत विकास पर भी समान रूप से आधारित होगा।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विभिन्न संकायों के छः उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं छः विद्यार्थियों को पीएच॰डी॰ की उपाधि प्रदान की।
समारोह में बी॰टेक डेयरी टेक्नोलाॅजी के 23, बी॰वी॰एससी॰ एण्ड ए॰एच॰ के 33, बी॰एफ॰एससी॰ के 25, एम॰टेक के 2, एम॰वी॰एससी॰ के 45 तथा एम॰एफ॰एससी॰ के 14 विद्यार्थियों को भी उपाधि प्रदान की गई।

समारोह को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री श्री नंदकिशोर राम ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री गोपाल मीणा, विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ॰ इन्द्रजीत सिंह, कुलसचिव कर्नल कामेश कुमार, विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण, शिक्षकगण एवं अन्य लोग उपस्थित थे।
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