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“पत्तों के गिर जाने से तरुवर कभी मरा नहीं करते, कर्म अमर हो जाता है, यश कभी मिटा नहीं करते”

“पत्तों के गिर जाने से तरुवर कभी मरा नहीं करते,
कर्म अमर हो जाता है, यश कभी मिटा नहीं करते”

मुजफ्फरपुर, 05 अप्रैल 2026 (रविवार):
श्रद्धेय आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री जी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर उनकी तपोभूमि निराला निकेतन, मुजफ्फरपुर में “प्रथम महावाणी स्मरण सह कवि गोष्ठी” का आयोजन श्रद्धा एवं साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिष्ठित कवि, शायर एवं साहित्यप्रेमियों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के गीत से हुआ, जिसकी प्रस्तुति कवि अंजनी कुमार पाठक ने की। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ भोजपुरी कवि सतेंद्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन ओम प्रकाश गुप्ता द्वारा किया गया।
कवि गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सतेंद्र कुमार सत्येन ने अपनी भोजपुरी रचना “नदिया के पार, उतार रे मल्हवा...” के माध्यम से लोकजीवन की मार्मिक झलक प्रस्तुत की। डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह ने “बसंत आ गया, खिली फूलों की कली” के जरिए ऋतु परिवर्तन का सुंदर चित्रण किया।

ओम प्रकाश गुप्ता की दार्शनिक पंक्तियाँ—
“पत्तों के गिर जाने से तरुवर कभी मरा नहीं करते,
कर्म अमर हो जाता है, यश कभी मिटा नहीं करते”
-ने जीवन के गूढ़ सत्य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कवयित्री डॉ. सुप्रिया सोनी, कवि अंजनी कुमार पाठक, हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा, अरुण कुमार तुलसी, रामवृक्ष राम चकपुरी एवं प्रमोद नारायण मिश्र ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को समृद्ध किया।

कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने सभी उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि, साहित्यकार एवं पूर्व वार्ड पार्षद विष्णुकांत झा के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।

अंततः अध्यक्ष की अनुमति से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।

यह कवि गोष्ठी आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री जी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करने के साथ-साथ साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुई।

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