वचन की कीमत
अरुण दिव्यांश
वचन कीमत अनमोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।
सुंदर वचन मुॅंह खोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।।
बड़ मुश्किल से तन ये पायो ,
मन को निज संभाल न पायो ।
मिथ्या शान शौकत दिखायो ,
पावन रिश्ता नहीं निभायो ।।
निज को पहले तोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।
वचन कीमत अनमोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।।
ईश्वर का है एक ही इशारा ,
एक ही सूरज चाॅंद औ तारा ।
विश्वबन्धुत्व हमारा है नारा ,
भाईचारे से लें न किनारा ।।
मत कर मानवता गोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।
वचन कीमत अनमोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।।
कटु वचन जीवन से त्यागो ,
बहुत सोए अब तुम जागो ।
कठोर वचन गोली न दागो ,
सब हेतु दुआ ईश से माॅंगो ।।
कटु वचन मिसरी घोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।
वचन कीमत अनमोल बंधु ,
सोच समझ कुछ बोल ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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