

बिहार में एलपीजी, पेट्रोलियम उत्पाद और ऊर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, आपूर्ति स्थिति पूर्णतः सामान्य
- बिहार में 3697 रिटेल आउटलेट और 8 डिपो के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 4550 किलोलीटर पेट्रोल और 9120 किलोलीटर डीजल की निर्बाध आपूर्ति जारी है
- राज्य में लगभग 2.33 करोड़ उपभोक्ताओं को 2028 वितरकों के माध्यम से एलपीजी मुहैया कराया जा रहा है
- अस्पतालों, स्कूलों और आवश्यक सेवाओं को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता
- राज्य में लगभग 1 लाख पीएनजी कनेक्शन, एक माह में जोड़े गए 8000 नए कनेक्शन
- नागरिकों से घबराहट में खरीदारी से बचने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
- कार्रवाई के दौरान 2085 सिलेंडर जब्त किए गए, 119 एफआईआर (FIR) दर्ज, 38 गिरफ्तारी की गयी
- बिहार के सभी जिलों में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त
- उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की दुकानों का ऐप के माध्यम से नियमित निरीक्षण, स्टॉक का किया जा रहा भौतिक सत्यापन
- अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में की जा रही लगातार छापेमारी
- कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई जारी
प्रविष्टि तिथि: 07 APR 2026 7:17PM by PIB Patna
पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर बिहार में पेट्रोलियम एवं कृषि उत्पादों की उपलब्धता पर पीआईबी पटना, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) एवं कृषि विभाग के समन्वय से आज पटना स्थित आईओसीएल कार्यालय में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। राज्य में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, अन्य पेट्रोलियम एवं कृषि उत्पादों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर जानकारी साझा की गयी। इस प्रेस वार्ता में अनुपम कुमार सामंतराय, कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख, बिहार राज्य कार्यालय के साथ सौरभ सुमन यादव, कृषि निदेशक, बिहार सरकार तथा सर्वेश कुमार सिंह, महाप्रबंधक, कॉर्पोरेट संचार, योजना एवं समन्वय, बिहार राज्य कार्यालय, एवं अन्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) एवं कृषि विभाग के प्रतिनिधि शामिल रहे।
एलपीजी एवं अन्य पेट्रोलियम
बिहार राज्य में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी सहित सभी पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति पूरी तरह सामान्य एवं नियंत्रण में है । राज्य सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के समन्वय और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के माध्यम से नागरिकों को बिना किसी बाधा के ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है ।
पेट्रोलियम और डीजल की उपलब्धता: राज्य में वर्तमान में 3590 ओएमसी और 107 निजी रिटेल आउटलेट (कुल 3697) संचालित हैं । प्रतिदिन औसतन 4554 KL पेट्रोल (MS) एवं 9121 KL डीजल (HSD) की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है । वर्तमान में राज्य के डिपो और सप्लाई लोकेशन्स पर पेट्रोल और डीजल दोनों का 12-12 दिनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है । सभी आउटलेट्स पर बिक्री सामान्य है और किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है ।
एलपीजी एवं पीएनजी की स्थिति: 15 बॉटलिंग प्लांट और 2028 वितरकों के माध्यम से लगभग 2.33 करोड़ उपभोक्ताओं को एलपीजी की सेवा दी जा रही है । औसतन प्रतिदिन 3.8 लाख रिफिल की डिलीवरी की जा रही है तथा लगभग 4.5 दिन का बैकलॉग निर्धारित बुकिंग सूची के अनुसार पूरा किया जा रहा है।
सभी एलपीजी सिलेंडर टेम्पर्ड प्रूफ सील के माध्यम से सुरक्षित किया गया है, जो किसी कालाबाज़ारी की संभावना नगण्य करता है। वही छात्रों एवं मजदूरों के सुविधा के लिए सभी कंपनियों के द्वारा 5 KG गैस कनेक्शन सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसका कनेक्शन केवल आधार कार्ड के माध्यम से लिया जा सकता है।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत वर्तमान में व्यावसायिक एलपीजी का 70% आवंटन स्तर बनाए रखा गया है। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, रक्षा, रेलवे, सरकारी प्रतिष्ठान, होटल/रेस्टोरेंट, औद्योगिक कैंटीन एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्राथमिकता दी जा रही है । पीएनजी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में लगभग 1 लाख पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध हैं। पिछले एक माह में लगभग 8000 नए कनेक्शन जोड़े गए हैं।
डिजिटलीकरण और पारदर्शिता: उपभोक्ताओं की सुविधा और पारदर्शिता के लिए एलपीजी सेवाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया गया है । पिछले दो महीनों में डिजिटल बुकिंग 70% से बढ़कर 93% हो गई है । इसके अलावा, सुरक्षित वितरण सुनिश्चित करने के लिए 90% मामलों में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का पालन किया जा रहा है, जो पिछले माह केवल 40% था ।
निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई: जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए राज्य सरकार अत्यंत सक्रिय है । आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक कुल 25,388 निरीक्षण किए गए हैं । इस दौरान 2085 सिलेंडर जब्त किए गए, 119 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं और 38 गिरफ्तारियाँ की गईं।जिला स्तरीय निगरानी समितियां प्रतिदिन स्टॉक की रिपोर्ट राज्य कंट्रोल रूम को भेज रही हैं ।
सरकार एवं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा सभी नागरिकों को आश्वस्त किया गया कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह स्थिर है । नागरिकों से अनुरोध किया गया कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और भ्रामक खबरों के प्रसार से बचें । साथ हीं घबराहट में खरीदारी न करें क्योंकि स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें और डिलीवरी के समय DAC साझा करें ।
कृषि एवं उर्वरक संबंधित
भारत सरकार द्वारा प्रत्येक माह उर्वरक आपूर्ति योजना के अनुसार उर्वरक विनिर्माता एवं आपूर्तिकर्त्ता एजेंसियों के साथ समन्वय कर बिहार राज्य को उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाती है । वर्तमान में बिहार के सभी जिलों में उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त है और किसानों को पैनिक न होने की सलाह दी गई है।
उर्वरक स्टॉक की वर्तमान स्थिति राज्य में दिनांक 06.04.2026 तक प्रमुख उर्वरकों का स्टॉक निम्नलिखित है:
- यूरिया: 2.88 लाख मे०ट०
- डी०ए०पी०: 1.44 लाख मे०ट०
- एन०पी०के०: 2.14 लाख मे०ट०
- एस०एस०पी०: 1.02 लाख मे०ट०
- एम०ओ०पी०: 0.44 लाख मे०ट०
जिला और प्रखंड स्तर पर कृषि पदाधिकारियों द्वारा उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की दुकानों का ऐप के माध्यम से नियमित निरीक्षण और पॉस (POS) स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जाता है ।राज्य के विभिन्न जिलों में उर्वरक की कालाबाजारी को रोकने एवं अधिक मूल्य पर विक्रय पर नियंत्रण हेतु जाँच दलों द्वारा उर्वरक प्रतिष्ठानों की नियमित छापामारी एवं निरीक्षण की जा रही है, वहीं जिलों से प्राप्त शिकायतों पर मुख्यालय स्तर से भी उड़नदस्ता जाँच दल लगातार कार्रवाई कर रही है।अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में उर्वरक की तस्करी रोकने हेतु जिला प्रशासन और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के बीच समन्वय स्थापित किया गया है।
प्रवर्तन कार्रवाई का विवरण
अनियमितताओं के विरुद्ध विभाग द्वारा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2025-26 में 116 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और 462 प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए गए हैं ।वहीं वर्ष 2026-27 (06.04.2026 तक) 11 प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज, 13 उर्वरक प्रतिष्ठानों के प्राधिकार पत्र रद्द और 92 के प्राधिकार पत्र निलंबित किए गए हैं ।
सहायता एवं संपर्क सूत्र: किसानों की सहायता और शिकायतों के निवारण हेतु राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं:
हेल्प लाईन नंबर (मुख्यालय): 0612-22333555
नोडल अधिकारी: श्री ब्रज किशोर, संयुक्त निदेशक (शष्य) उपादान संपर्क: 9031643038
वैकल्पिक कृषि एवं अन्य पहल: किसानों को उर्वरकों के वैकल्पिक उपयोग हेतु जैविक खेती प्रोत्साहन कार्यक्रम, परम्परागत कृषि विकास योजना,जैविक कोरिडोर योजना और प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसानों को जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशक अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। जैविक योजना के तहत किसानों को जागरूक करने हेतु कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं । वर्तमान में राज्य में उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त है। आगामी खरीफ हेतु उर्वरक भंडार को संरक्षित रखने हेतु जिला पदाधिकारी एवं कृषि विभाग के पदाधिकारियों को निदेश दिया गया है । यदि कहीं अनिमियतता परिलक्षित होती हैं तो संबंधित के विरुद्ध विधि सम्मत कार्यवाई की जाएगी । अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर भारत सरकार घरेलू उर्वरक उत्पादक कंपनियों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित करेगी ।
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