योग्यता का आकलन, अब नम्बर होने लगा,
योग्यता का आकलन, अब नम्बर होने लगा,शिक्षा का स्तर स्कूल में, नम्बरों से होने लगा।
ए सी बिल्डिंग मँहगी फ़ीस, आधुनिक कपड़े,
स्कूल मूल्यांकन सौ प्रतिशत रिज़ल्ट होने लगा।
कितने बच्चे सौ प्रतिशत, स्कूल के बोर्ड पर,
कितने पिच्चानवें वाले, क्लास रूम बोर्ड पर।
इससे कम नम्बर अगर, माँ बाप पर दबाव है,
स्कूल की प्रतिष्ठा प्रथम, विज्ञापन बोर्ड पर।
मानसिक स्तर सभी का, होता जुदा जुदा,
पढ़ने पढ़ाने का ढंग भी, सबका जुदा जुदा।
कुंठाएँ माँ बाप की, बच्चों पर हावी हुई,
सरकारी पब्लिक स्कूल, मापदंड जुदा जुदा।
फुर्सत नहीं माता पिता को, बच्चों पर ध्यान दें,
चिन्ता नहीं शिक्षकों को, शिक्षा स्तर पर ध्यान दें।
स्कूलों का मतलब फ़क़त, धन और नाम की चाह,
महत्वाकांक्षाएँ छोड़ कर, बस बच्चों पर ध्यान दें।
लक्ष्य बच्चों का बनायें, ज्ञानवान शिक्षित बनें,
नम्बरों की आपाधापी, व्यर्थ होती इससे बचें।
पूछता कोई कहाँ, कब कितने नम्बर आये थे,
ज्ञान का अर्जन कर, योग्यता से इतिहास रचें।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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