वाणी
अरुण दिव्यांशवाणी पहिला व्यवहार बा ,
वाणी पहिला आचार बा ,
वाणी पहिला विचार बा ,
वाणी ना कहीं लाचार बा ।
ना रहे कभी आव ताव में ,
ना रहे कभी छाव भाव में ,
ना चाहे रहल बदलाव में ,
वाणी रहे एके स्वभाव में ।
वाणी सर्वोत्तम व्यापार बा ,
वाणी सर्वोत्तम संचार बा ,
वाणी में शक्ति अपार बा ,
वाणी खुशी के भंडार बा ।
वाणिए कारण सम्मान बा ,
वाणिए कारण अपमान बा ,
वाणिए से बनल स्थान बा ,
वाणिए जीवन कल्याण बा ।
वाणी त अपने महादान बा ,
वाणी में जीवन के जान बा ,
वाणी जीवन के परित्राण बा ।
वाणी में गुणन के खान बा ,
वाणिए में भरल विज्ञान बा ,
वाणी आदमी के पहचान बा ,
वाणी बिन मानव नादान बा ।
वाणी जीवन के विमान बा ,
वाणी जीवन के मेहमान बा ,
वाणी जीवन के एहहान बा ,
वाणी प जीवन के गुमान बा ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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