सतुआनी पर्व का महत्व और प्रचलन

अनमोल कुमार
सतुआनी के अन्य पहलू बहुत व्यापक हैं। यह त्योहार न केवल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रकृति के साथ जुड़ाव और आरोग्य लाभ की ओर भी इशारा करता है । कहीं कहीं सतुआनी को विशुआ पर्व भी कहा जाता है।
सतुआनी के अन्य पहलू:
- प्रकृति का सम्मान: सतुआनी प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है, जो हमें पर्यावरण के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।
- आरोग्य लाभ: सत्तू का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है, जो पाचन को सुधारता है, ऊर्जा प्रदान करता है और शरीर को ठंडक देता है।
- सामाजिक बंधन: सतुआनी का त्योहार लोगों को एक साथ लाता है, जो सामाजिक बंधनों को मजबूत करता है।
- कृषि का महत्व: यह त्योहार किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो उनकी फसल की कटाई के समय का प्रतीक है।दलहनी फसल की कटाई के बाद किसान बड़े उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते है।
- सांस्कृतिक विरासत*: सतुआनी हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जो हमें हमारी जड़ो से जोड़ता है।
सतुआनी एक पारंपरिक त्योहार है जो मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है जो गर्मी की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन लोग सत्तू, नमक या गुड़ - चीनी, आम के टिकोले की चटनी, भूना मिर्चा के साथ साथ तरबूजा,ककड़ी आदि का दान और सेवन भी करते हैं। इसके अलावा सूर्य देव पूजा सेवन से पहले करते हैं। सत्तू का सेवन करना इस दिन शुभ माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठण्ढ़क देता है और गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। प्रस्तुति - अनमोल कुमार।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews