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धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम

(रामनवमी _2026)
धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम 
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जीवन आभा सहज सरल,
शीर्ष वंश परिवार परंपरा ।
स्नेहिल दृष्टि उदार ह्रदय,
वरित समस्त जीव जंतु धरा ।
समता समानता भाव दर्शन,
मुखमंडल सौम्यता अभिराम ।
धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम।।

तज राजसी ठाठ बाट,
वनवास सहर्ष स्वीकार ।
निज स्वार्थ मोह तिलांजलि,
पितृ आज्ञा वचन साकार ।
मन साधक तन आराधक,
प्रकृति उत्संग जप अविराम ।
धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम।।

नीति रीति सद्भाव अभिव्यंजना,
अपनत्व पराकाष्ठा व्यवहार ।
शापित शोषित दिव्य उदारक,
उरस्थ मृदुल मधुर नेह धार ।
शौर्य वंदन असुरता प्रहार,
मानवता उत्थानित भाव प्रणाम ।
धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम।।

प्रेरणा पुंज व्यक्तित्व कृतित्व,
उत्तम पुरुष आचार विचार ।
शील शिष्ट सदाचारित शैली,
संघर्ष पथ पर निर्भय विहार ।
श्रेष्ठ छवि राम लोक मानस,
कलयुग अंतर सम त्रेता धाम ।
धरा गगन गूंज रहा,जय जय श्री राम।।

*कुमार महेंद्र*
(स्वरचित मौलिक रचना)

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