राम का नाम
जय प्रकाश कुवंर
" राम से बड़ा राम का नाम "।
यह चौपाई संत तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में आती है। इसका मतलब यह है कि भगवान प्रभु राम से भी बड़ा राम का नाम है। जैसे प्रभु श्रीराम अनंत हैं वैसे ही उनका राम नाम भी अनंत है। राम नाम केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह परब्रह्म, असीम उर्जा और सत्य का प्रतीक है। राम के गुण और कथाएँ असीम हैं, जिन्हें करोड़ों कल्पों में भी पूरी तरह कहा अथवा गाया नहीं जा सकता है। राम नाम मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन के हरेक क्षण में तथा सांस में दिव्य आनंद प्रदान करता है।
श्रीरामचरितमानस में एक जगह ऐसा प्रकरण आया है, जिसमें कहा गया है कि भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ मिलकर इस उदार राम नाम का हमेशा जप करते रहते हैं। यह राम नाम मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है।
एहि मॅह रघुपति नाम उदारा।
अति पावन पुरान श्रुति सारा।।
मंगल भवन अमंगल हारी।
उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।
सभी देवता, ऋषि-मुनि तथा अनेकों मनुष्य अपने मन की शांति के लिए अपने हाथ में १०८ मनकों का माला लेकर जाप करते रहते हैं। शिव पत्नी माता पार्वती के साथ ही कुछ तो विष्णु सहस्त्र नाम आदि का भी भजन करते रहते हैं। राम नाम की महिमा भगवान शिव से बेहतर भला कौन जान सकता है। इसलिए तो वे सदा राम नाम जपते रहते हैं। राम नाम की महिमा बताते हुए भगवान भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती से कहते हैं कि विष्णु का सहस्त्र नाम जपने के बराबर है एक राम का नाम ।
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्त्र नाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने।।
यह राम नाम सभी सांसारिक आपदाओं को हरने वाला, सभी सम्पदाओं को देने वाला तथा मानसिक शांति प्रदान करने वाला है। इसलिए भगवान शिव राम नाम को बार बार प्रणाम करते हैं।
आपदामपहर्तारं दातारं सर्व संपदाम् ।
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।
उनका यह पुनः कथन है कि राम नाम का जप, सभी दुखों और समस्याओं को समूल नष्ट करने वाला, सुख संपत्ति को अर्जित करने वाला तथा यम दूतों को भगाने वाला एक गर्जन है।
भर्जनम् भव बीजानाम् अर्जनम् सुख सम्पदाम्।
तर्जनम् यम दूतानाम् राम रामेति गर्जनम्।।
धार्मिक महत्ता के साथ ही राम नाम का एक वैदिक महत्व भी इस प्रकार है। राम शब्द र+ आ+म से बना हुआ है। राम शब्द में र हिन्दी वर्णमाला का २७ वां, आ २ रा, तथा म २५ वां वर्ण है। अतः राम शब्द में आये तीनों वर्णों का कुल योग २७+२+२५ =५४ होता है। एक बार राम कहने से ५४ तथा दो बार राम कहने से ५४+५४=१०८ का योग बनता है। हिन्दूओं का मंत्र जाप का माला १०८ मनकों से बनता है। अतः राम राम कहने से अध्यात्मिक उर्जा का १०८ बार जाप का पुण्य मिलता है।
संस्कारी लोग जब किसी से मिलते हैं तो राम राम जी कह कर अभिवादन करते हैं। आदर स्वरूप जी के साथ राम राम कहना एक पवित्र अभिवादन है जो सकारात्मक ऊर्जा सुख शांति तथा प्रभु राम के प्रति आदमी के समर्पण को दर्शाता है।
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