जाँता
डॉ सच्चिदानंद प्रेमी
जाँता के जलम कहाँ कैसे आउ कब भेल ,ई बड़का रिसर्च के बिसय हे ।गोस्वामी जी एकरा पर रिसर्च करके हाथ खड़ा कर देलन आउ लिख देलन -
नहीं तब आदि मध्य अबसाना ॥
एकर मतलब कि सृस्टी के साथही जाँता भी बनावल गेल हल ।
बाकि अबहियों मौका हे । एकर आदि मध्य अबसाना जे पता कर लेतन उनका ला नोबुल पुरस्कार इंतजार कर रहल हे ।
एकर खोज में केतनन निकललन बाकि एतने खोज पयलन कि जाँता के अविस्कार जाँते से होयल हे ।जे जाँतलक ऊ जाँता ।पहिलका जमाना में धुनिया केहाँ से नेहली भरा के आबऽ हल त ऊ जाँते से जातल जा हल - फलकल रुइया बैठबे खातिर । खैर, जे होबे ,एकर गुनगान सेस ,सारदा वेद पुरान तक न कर सकलन -
करिनसकहीं नाम गुन गाना ।
सेस सारदा वेद पुराना ॥
जाँता में दू गो पार्ट होबऽ हे । ऊपरका के उपरौंटा आउ नीचेवाला के तरौंटा इया अघरौटा कहल जा हे ।जाँता असल में उपरौटे के कहल जा हे । एकरे पाट चोरा के अंगरेज लोग पार्टी बनौलन । हमनी ओही पार्टी में पउआ जोड़ के पाटी- पउआ बना के खटिया खड़ी कर देली ।एही जाँता से जाति बन गेल जेकर चर्चा बजार में धूम मचा देहे । जाति के भात नामी हे ।एही जाति के भभात से भोट - भाट बनल ।ई गुने अपन छाव न छोड़े खेसारी न्याय के अनुसार भोट - भाट में जाति के अहम भूमिका होवऽ हे ।अगर ई जाति न रहे तो भोट भाट मैं आयोग के काफी परेसानी हो सकऽ हे ।
दुनू पाट जब एक दोसरा के साथ न दे हे त खटपट होबे लगऽ हे ।
उपरौंटा में दू गो किल्ला के सहारे हँथड़ा ठोकल जाहे । बीचे में एगो फाँफड़ ऐसन छेद होबऽ हे जेकरा में झींक दालल जा हे ।जब जाँता बन रहल हल त गोस्वामी जी ओहँई हलन ।ऊ देखलन हल सहस्रावाहु के बनाबइत । ऊ ओहँई टाँक देलन हल -
सहस्रावाहु भुज छेदनिहारा ॥
तरौंटा के बीचो बीच एगो गोल छेद होव हे जेकरा में कीला ठोक के ओकरा स्थिर रखल जा हे ।ई हो गेल जाँता ।
जाँता में जे पड़ गेल ओकरा पिसाहीं पड़ऽ हे ,चाहे ऊ पत्थर होवे चाहे पहाड़ ।गोस्वामी जी लिखलन हे -
चक्रवर्ति दशरथ जी इहाँ एही ला बड़ी भीड़ लगल रहऽ हल -
महा भीर भूपति के द्वारे ।
रज होइ जाहिं पसान पबारे ॥
जाँता तो घर घर के चीज होव हल ।एकर संबंध डाइरेक्ट अंतःपुर से होबे के चलते कहाउत कहल जा हल -
जोरू न जाँता ,
खोदा मियाँ से नाता ।
जाँता जोरू के सहधर्मी हे ।जाँता चलाबे के काम जोरुए करऽ हलन ।
कहल जा हे कि कबीर दास जी विरक्त साधु हलन -पूरा बैरागी।बाकि जाँता से ऊनका राग हल ।ई गुने ऊ जाँता जरूर रखऽ हलन ।एकर गुन भी जानऽ हलन ,से कहलन -
पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पुजूँ पहार ।
ताते ई चक्की भली ,जे पीस खाय संसार ॥
वही चक्की जाँता हे जे पिस पिस के संसार के खिलाव हे - चाहे घर से चाहे मील से ।
एतने नऽ-
चलती चक्की देख के कबिरा दिन्हा रोय।
दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय॥
ऊ तो वही जगह मलूक दास जी हलन की बचौलन ,न तो कबीर बाबा सबके स्वाहे कर देलन हल -
चलती चक्की देख लके हँसा मलूक ठठाय।
कील सरन में जो गया ता नहिं पिसा जाय॥
दवता लोग भी एकर गुन - अवगुन जानऽ हलन ।ई से जाँता देख के बड़ी खुस होव हलन । अयोध्या में सबके प्रवेस न होव हल बाकि गुरु बसिष्ठ जी के आज्ञाँ हल कि जाँता जे लेके आबे या बेचे आबे ओकरा कोई रोके न ,देख के खुस होबे -
सदा रहहू पुर आबत जाता ।
किशोरी जी के विआह ला महाराज जनक जी स्वयंवर रचलन ,से सुन सुन के ढेर सा राजा महराजा आ गेलन । एकुरेट संख्या तो बताना संभव न हे बकि अंदाज लगाबल जा सकऽ हे।गोसांई जी देखलन हल से लिखलन -
भूप सहस दस एकहीं बारा ।
एकर माने कि दस हजार राजा हलन ।अब ऊ सब एके वार लगलन कि एके दिन - ई माथे माथे अलग अलग सोंच हे ,बकि हलन तो दासे हजार ।अच्छा ,
रावण बाण छुआ नहीं चापा ।
रावण आउ वानासुर ऐसन प्रतापी राजा छूबो न कयलन ।एको गो राजा बिन बॉदीगार्ड आउ बिना सारथी के न गेलन होत ।साथै एगो मंत्री आउ एगो परिकर भी होबे करतैन ।माने दस हजार गुने पाँच बराबर पचास हजार ,आउ विश्वामित्र ,राम,लक्ष्मण ,रावण ,बानासुर ,देखनहारा सुननहारा ऐसन छूटल बढ़ल बीस हजार, माने सत्तर हजार राजा महराजा तो अंगुरी पर गिनल हलन । किशोरी जी के इहाँ सिद्धिसदन में खचाखच भीड़ ,राज महल मे अपार खुसी आउ व्यवस्था करे वाला के परेसानी कि लिटियो लगावेला आँटा सत्तू के व्यवस्था कैसे कएल जाए। ।से एगो देवता के धड़ाम से इयाद पड़ल -
देवन्ह देखेउ दसरथ जाता ।
विशवामित्र जी रस्ता में होटल ढावा में न खा हलन ।से राम जी के लेके अयोध्या से चललन हल त जनक जी साथे एगो जाँता भी देलथी हल ।सदेवता लोग देखलन हल से उनका इयाद पड़ल । फिर का हल -
महा मोद मन पुलकित गाता ।
जाँता घर के सबसे उपयोगी सामान होव हे बाकि अब तो घरे घर खोजलो पर न मिले ।छठ उठ में एकर कीमत बढ़ जा हे ।
जाँता घर से निकल के सहर में चल गेल ,वहाँ मील कहाबे लगल ।हाँथ से चलबे वालीन सब सुकामारिन हो गेलन । हँथड़ा पर हाँथ रखे में लाजो लगे लगल से जाँता घर से दूर हो गेल ।आउ एकरा डूर होते डाइबिटिज,सूगर,ब्लड प्रेसर,हार्ट अरेस्ट ,,मोटापा ,थायरायड ,ऐसिडिटी आउ ई सब के चेला चाटी रोग धाक जमा लेलन । कोई साथी संगी के इहाँ जा त पहिले ऊकहता -चाह बनाहुन न ,बड़ी दिन पर अयलथी हे । त उनकर मेहरारू पुछतन - चीनी वाला कि बिना चीनी के ? घरे घर यही सुने ला मिलऽ हे कि हमर मेहरारु के ======के रोग हो गलो हे,बड़ी परेसानी में हिञो ।
जाँता के लोप होइते जंक फूड जंग छेड़ देलक ।सत्तु,चूड़ा फरही फुटहा लड़िकन के ओठ से सरक गेल ।चाउमिन, मैगी ,बरगर पीजा के राज आ गेल ।ई सब मिल के एकेबार पौकेट आउ पेट पर हमला कर दे हथ । बीमारी तो उनका ही ठेंट गाड़ के अड्डा जमाबऽ हे ।
अगर अपन घर के बीमारी से दूर कयल चाहऽ ह त हमर बात बिना कोई सर्त आउ सरारत के मान लऽ-
जा घर जाँता ओखड़ी ता गर रोग न जाय । डॉ सच्चिदानन्द प्रेमी
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