मेहबूब का स्वागत
चाँद भी आज न जाने
क्यों शर्मा रहा है।
जबकि उसे पता है की
मेरा मेहबूब आ रहा है।।
धरा पर बिखेर दो फूलो को
हे बाग़ीचे की रानी तुम।
मेरे मेहबूब के स्वागत
और उसके सत्कार में।।
घटाओं तुम भी बिछा दो
अपनी कालि घटाओं को।
और वर्षा दो आकाश तुम
मेहबूब के आने की खुशी में।।
चाँद तारे तुम भी निकल आओं
पूर्णिमा की रात आज बनकर।
और महक उठो रात की रानी
मेहबूब के आने से पहले तुम।।
मिलन होगा मोहब्बत का
शमा के जलने पर आज।
चिराग बुझे पड़े थे जो दिलके
मिलन से आज जल उठे वो।।
लगाये आँख बैठी है स्वागत में
बसुन्धरा ओस बनकर बरसाने को।
बिछा दी मोती की चादर उसने
मेहबूब के लिए हरी हरी घास पर।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews