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नए वर्ष में फूल बनेंगे जलते जग अंगारे

नए वर्ष में फूल बनेंगे जलते जग अंगारे

डॉ सच्चिदानन्द प्रेमी
श्रृंगार के गीत मधुपों ने भृंग शैली में गाए। ऊषा ने अंगड़ाई ली ,वृक्षों के उत्तुंगवासी कोमल किसलय थिरकने लगे, पक्षियों के कलरव ने चीं चां का शोर परिकल्पित किया। साधुओं की टोली गंगा स्नान को जाने लगी ,प्रभाती टोली, हाँ !हाँ !गाँव की प्रभाती टोली जय सियाराम जय जय सियाराम की गुंज पर थिरकने लगी ।लगता है भोर हो गया ।आँख मांजने की आवश्यकता नहीं पड़ी, आँखें विस्तारित स्वयं स्वयं ही हो गईं-इतना सुंदर ऊषा का अंचल! प्रकृति में परिवर्तन हो गया ,दक्षिणावर्ती गली के नुक्कड़ पर उठे शोर ने स्पष्ट कर दिया -नई सुबह नहीं ,नया भोर नहीं,यह तो वर्ष ही नया आ गया -नूतन वर्षाभिनंदन !
बौधू ने गेहूँ का बोझा सुरभि गाय के गोबर से लीपे हुए खलिहान में पटकते हुए कहा- मनमा काहे तो बौरा रहलो हेो लगऽ हो कुछो नया हो गेलो हे , नया बछर आबऽ हे ओइसन ।
वाह ! कवि जी वाह !
खिड़की दरवाजे सब बंद ही रहे
घर आंगन कैसे मकरंद हो गए !
खिड़की दरवाजे बंद कर सोई हुई कोहबर कुंज से माननीया ने कहा -
नया वर्ष आयो रे भाई ,कंत नहीं आयो।
"या देवी सर्व भूतेषु "श्लोक उच्चरित करते हुए भगवति पान्डेय ने इशारा किया - दीए में घी डाल दें ।यह नए वर्ष का प्रथम दीप है ।
रात्रि का चतुर्थ प्रहर ,खिड़कियां हिलीं,कुछ तेजी से अंदर प्रविष्ट हुई, तने हुए तन पर पवन ने अपने हाथ फेरे और संवेदना में रोमांच हो आया ।फिर उसने मन को छुआ ,मन प्रफुल्लित हो उठा। इस प्रसन्नता का परिवर्तन या परिवर्तन की प्रसन्नता मन और तन की अठखेलियों से और आगे संस्सृत हुआ -
अहा हा हा! कितना सुंदर परिवर्तन है ! यह खिड़की से झांक कर अंदर घुसने वाली दक्षिणाही हवा !लगता है बसंत आ गया!
बसंत के आगमन पर
असमंजस का दामन थाम्हे मैं अपने ड्राइंग रूम से में घुसा, टेबल पर पड़ी डायरी पलटी ,आज तो नया वर्ष है नहीं ।वह तो आज के 3 माह पूर्व ही 1 जनवरी को आ गया था ।यह कैसा नव वर्ष अभिनंदन ?फिर बाहर निकला भीतर के निर्जीव अस्तित्व को छोड़कर बाहर आया ,सब कुछ सजीव ,प्रकृति झूम -झूम कर थिरक रही थी ,जयघोषों के साथ नृत्य निरत पादप पर्वत श्रृंगो की प्रति ध्वनियां मानो घोषणा कर रही थीं -
नए वर्ष में हम छू लेंगे नभ के चांद सितारे
नए वर्ष में मधुमय होंगे सागर के जल खारे
बाहर-भीतर के द्वंद को मिटाने में प्रयास नहीं करना पड़ा। घर निर्जीव, ड्राइंग रूम भी निर्जीव और बाहर ?
बाहर सब कुछ अजीब ! सजीव ! आम्र मंजरित बल्लरियों पर भंवरों का नर्तन ,पक्षियों का कलरव, वन वनाली की थिरकन ,जुगल जोड़ियों के गान और स्वयं के मन का असीम उत्साह ,सभी अपनी संजीदगी का ऐहसास करा रहे थे। पत्तों वाली डालियों ने पीतपर्ण उतार दिए थे , किसलय की कोमलता ने पाषाण स्लेट पर पवि से लिख छोड़ा था -संवत्सर नया-नया !
गेहूं की नई फसल कटने लगी ,अनाजों का राजा नया चना युवराज से राजा हो गया ।नागो चा ने तो गेहूं की खलिहान में ही ऐलान कर दिया -
नया वर्ष है आया है भाई नया वर्ष है आया ।
यही तो आनंद है, हमारा नया वर्ष आज से ही शुरू हुआ ।
आज से नया वर्ष क्यों शुरू हुआ, इसके पीछे हमारा पुराना इतिहास खड़ा है ।
1-आज विक्रम संवत् 2078 का पहला दिन है ।
2-आज कलयुग संवत् 5122 वर्ष का पहला दिन है ।
3-आज वेद सम्बत का 1,96,08,53,122 वर्ष का पहला दिन है ।
4-आज मानव सृष्टि का 1,96,08,53,122 वर्ष शुरू हुआ ।
5-आज कल्प संवत का 1,97,38,13,122 हुआ।उसका भी आज पहला दिन है ।
6- ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथ हिमाद्रि के अनुसार जगत (सृष्टी) की उत्पति आज ही के दिन सुर्योदय के समय हुई थी-
चैत्र मासी जगद् ब्रह्मा ससर् प्रथमेऽहनि ।
शुक्ल पक्षे समग्रन्तु तथा सूर्योदये सति ॥
जगत की उत्पत्ति का आज पहला दिन है।कल्प संवत 1,97,38,13,122 वाँ वर्ष ।
7-पूर्व तीन चतुर्युग के पश्चात आज के दिन ही त्रिबिष्टप के मानसरोवर में अमैथुनी पद्धति से ॠषियों की उत्पत्ति हुई थी और उत्पन्न होते ही वे समाधिस्थ हो गए थे।
8- 5 वर्ष बाद आज ही के दिन वेदों का आविर्भाव हुआ था ।
9-आज के दिन ही है 12,05,33,121 वर्ष पूर्व वैवस्वत मन्वंतर का आरंभ हुआ ।
10- 5121वर्ष पूर्व आज के दिन ही कलियुग का प्रादुर्भाव हुआ था। भारतीय गणना के अनुसार कलियुग की उम्र आज5121 वर्ष हुई ,परन्तु पाश्चात्य गणनाकार बैली के अनुसार 5153 वर्ष हुई।
11-चक्रवर्ती सम्राट श्री राम प्रभु का राज्याभिषेक आज के दिन ही हुआ था।
13- महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी आज के दिन ही हुआ था ।
14-सम्राट विक्रमादित्य ने 2078 वर्ष पूर्व आज के दिन ही संगठित राष्ट्र को स्थापित किया था।
15-सिक्खों के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म आज के दिन ही हुआ था ।
हमारे पास नया वर्ष मनाने के इतने सारे औचित्य हैं, इसलिए हम आज के दिन नया वर्ष मनाते हैं ।
आज का दिन कितना पावन, मनभावन और पवित्र है ।साहित्यकारों की मंडली में एक कवि ने अपना गीत सुनाया -
नए वर्ष में हम छू लेंगे नभ के चांद सितारे।
नए वर्ष में मधुमय होंगे सागर के जल खारे ॥
नए वर्ष के आगमन पर लताओं ने पुष्प खिलाए, गंध बिखेरते पुष्पो से पराग झरे ,दिग्- दिगंत में अरूणाई छाई, किशोरों की तरुणाई ने अंगड़ाई ली-
बसंत के चपल चरण!
मार्च का अर्थ होता है आरंभ। मार्च पास्ट- सेना के अधिकारी ने आदेश दिया- मार्च! लेफ्ट- राइट- लेफ्ट करती हुई टुकड़ी आगे बढ़ गई ।यही तो नव संवत्सर है ।
नई फसलें, नए अन्न, दलहन- तिलहन- सब्जी- साग, सब नया नया। खेत आराम करने लगे खलिहान निहाल हो गए- नया वर्ष आ गया । रात की निद्रा से उबरते हुए सुबह-सुबह लाला ने पूछा- दादा जी! नया वर्ष आ गया क्या ? उत्साह शरीर धारण कर चतुर्दिक घूम रहा है। माथे पर कलश लिए राजमार्ग पर घंट -घरियाल के साथ लोग जा रहे हैं। सर्वत्र आनंद ही आनंद है। यही नया वर्ष है।
हमारा नया वर्ष उत्साह के साथ आता है ,हमारा नया वर्ष संस्कार के साथ आता है ,हमारा नया वर्ष जयघोष के साथ आता है ,हमारा नया वर्ष राष्ट्र की मर्यादा के साथ आता है ।हमारा नया वर्ष आ रहा है ।नए वर्ष में धूप धूम्र और मंत्रोच्चार से चतुर्दिक मंगलमय हो रहा है ।लगता है पृथ्वी अपने उमंग में आसमान को छूना चाहती है और आसमान पृथ्वी पर झुक झुक जा रहा है ।
नया वर्ष फिर आया
नया वर्ष फिर आया मानिनी,
नया वर्ष फिर आया ।
नयन नयन में उमगी आशा,
कुमुद केतु फहराया ।
पल्लव दल की झीनी चोली,
रस मदमाती कोयल बोली,
खिले चांद पर उमड़ घुमड़ कर -
हृदय सिंधु लहराया ।
नया वर्ष फिर आया ।
खेतों में गेहूं की बाली ,
थिरक रही दे दे कर ताली,
मंजर दल के नए टिकोरों-
पर रितु पति भरमाया ।
नया वर्ष फिर आया ।
बालसखा संग सीटी पीटी ,
खेल रहे सब खेल कबड्डी ,
कोहवर घर के उच्च झरोखे -
से आंचल लहराया।
नया वर्ष फिर आया ।
कितनी बार अभी तक मिलकर ,
गाए गीत सलोने खिलकर ,
किंतु मानिनी तृप्ति सुधा से-
हृदय नहीं भर पाया ।
नया वर्ष फिर आया।
और ,वह नया वर्ष क्या ,
नया वर्ष क्या आया भाई जगे किशोर चिल्लाए
घने कोहरे में फंस कर कितनों ने जान गँवाए
नया वर्ष है नई उमंग है मुंह पर नए तराने
कितने मुर्गे हुए शहीद फिर पार्टीन मीन अनजाने
नई किरण क्या फ़ैली खोया आंखों ने शुभ पानी
कितने जलचर प्राण गंवाए भोज भात बेमानी
नए वर्ष में हम रच देंगे चंचल हास मनोरम
चुपके-छुपके मौज मस्ती से पिएंगे हाला हम भरदम
पौ फटने पर लोग जगेंगे देखेंगे सुबह सुनहला
न मौसम बदला न दिल बदला नवृल वर्ष पर दिल दहला।
जय हो जय हो जय हो नवल वर्ष मंगलमय हो
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