जीबीएम कॉलेज में ‘जीवन विद्या’ पर 20 दिवसीय कोर्स का शुभारंभ, छात्राओं को मिलेगा मूल्य आधारित शिक्षा का प्रशिक्षण

गया। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा गठित दृष्टि क्लब के तत्वावधान में तथा आईक्यूएसी के संयुक्त सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के मूल्य आधारित शिक्षा के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए “जीवन विद्या” विषय पर 40 घंटों का 20 दिवसीय विशेष कोर्स प्रारंभ किया गया। इस कोर्स की शुरुआत कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल की पहल पर की गई है, जिसका संचालन दर्शनशास्त्र विभाग की सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जया चौधरी, डॉ. अमृता कुमारी घोष, डॉ. पूजा राय एवं डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय के संयुक्त निर्देशन में किया जा रहा है।

इस अवसर पर प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. सहदेब बाउरी ने मुख्य वक्ता आचार्य नवीन का स्वागत करते हुए छात्राओं से इस कोर्स का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. जया चौधरी ने कोर्स के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दृष्टि क्लब द्वारा संचालित यह पहल न केवल छात्राओं बल्कि कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने छात्राओं को आत्ममूल्यांकन के माध्यम से अपने व्यक्तित्व एवं व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी।
कोर्स के प्रथम दिन आचार्य नवीन ने छात्राओं को जीवन में मानवीय मूल्यों की महत्ता बताते हुए धीरता, वीरता, उदारता, प्रेम, दया, कृपा और करुणा जैसे गुणों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हीनता, दीनता और क्रूरता जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त होकर ही मनुष्य दिव्यता की ओर अग्रसर हो सकता है।
उन्होंने समझदारी को सुखी परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला बताते हुए कहा कि जीवन में केवल धन अर्जित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रेम और सद्भावनाओं का संचय भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार जहाँ धन शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करता है, वहीं प्रेम आत्मा को संतुष्टि प्रदान करता है।
आचार्य नवीन ने अपने व्याख्यान में दिव्य मानव, देव मानव, जागृत मानव, राक्षस मानव और पशु मानव के बीच के अंतर को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि समझदारी की निरंतरता ही ईमानदारी है, ईमानदारी से जिम्मेदारी का बोध होता है और जिम्मेदारी से साहचर्य एवं समन्वय के साथ जीवन जीने की कला विकसित होती है। इससे परिवार और समाज में व्यक्ति की भागीदारी अधिक प्रभावशाली और उपयोगी बनती है।
कॉलेज की पीआरओ डॉ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि यह कोर्स अगले 20 दिनों तक प्रतिदिन दो घंटे की अवधि में संचालित होगा। इस दौरान छात्राओं को “जीवन विद्या” के प्रबोधक आचार्य नवीन द्वारा जीवन को संबंधपूर्वक जीने की कला, सह-अस्तित्ववाद, मानवीय संवेदनाएँ, भावनाएँ, मानव की समस्याएँ तथा उनके कारण और समाधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानाचार्या के निर्देशानुसार कोर्स की सफल पूर्णता के बाद सभी प्रतिभागी छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित कक्षा में प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. सहदेब बाउरी, डॉ. जया चौधरी, डॉ. अमृता कुमारी घोष, डॉ. पूजा राय, डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय, डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, प्रीति शेखर, डॉ. सुनीता कुमारी, अभिषेक कुमार भोलू, रौशन कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्राएँ — खुशी राज, मुस्कान परवीन, चंचल, अनुष्का राज, मुस्कान कुमारी, वैष्णवी, अनीषा, साधना, शिवानी, गीतांजलि, निर्जला आदि उपस्थित रहीं।
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