ग्रेटर नोएडा। आज यहां पर ग्राम नियाना आर्य समाज की ओर से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जिले भर के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। इस अवसर पर यह निर्णय लिया गया कि आगामी 11 अप्रैल को 28 जिलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें जेवर एयरपोर्ट का नाम स्वामी दयानंद जी महाराज के नाम पर रखने के लिए आगामी रूपरेखा पर विचार किया जाएगा।
आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज के बारे में इस बात पर सभी लोग सहमत हैं कि उन्होंने ही देश में आजादी की अलख जगाई थी। परंतु इसके उपरांत भी स्वामी दयानंद जी के साथ अन्याय किया गया और उन्हें इतिहास में समुचित स्थान और सम्मान नहीं मिला। इसलिए प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार से संगठन मांग करता है कि स्वामी जी महाराज को उनका समुचित स्थान और सम्मान देने के लिए जेवर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा जाए।
डॉ आर्य ने कहा कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्य समाज के जिलाध्यक्षों महामंत्रियों और उनके अन्य पदाधिकारियों के लिए पत्र जारी कर दिए गए हैं और उनसे इस आगामी कार्यक्रम में उपस्थित होने का आग्रह किया गया है। सभी सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों व संस्थाओं को भी पत्र लिखा गया है, जिसमें उनसे इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की मांग की गई है। अन्य प्रदेशों के भी संगठनों को साथ लेने का प्रस्ताव पारित किया गया है। किसान संगठनों ने आर्य समाज के साथ आने का स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल को आयोजित होने वाले आर्य महासम्मेलन में बड़ी संख्या में आर्य नेताओं के पहुंचने की उम्मीद है ।
कार्यक्रम के बारे में विशेष जानकारी देते हुए भाषा प्रचारिणी सभा के जिला अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम ग्रेटर नोएडा के ईशान कॉलेज में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत के ज्ञान विज्ञान ने प्रारंभ से ही संसार का मार्गदर्शन किया है। हमारे अनेक वैज्ञानिक आविष्कार भारत में प्राचीन काल में ही संपन्न हो चुके थे। परंतु मध्यकाल में यूरोप के लोगों ने हमारे ज्ञान की चोरी करके उन्हें अपने नाम से प्रकाशित कर दिया। इसका सबसे सुंदर उदाहरण वायुयान का है। जिसे प्राचीन काल में ऋषि भारद्वाज ने अपने ग्रंथ वृहदविमानभाष्य में उल्लेखित कर दिया था। उन्होंने 100 प्रकार के विमान के बनाने की विधि अपने उस ग्रंथ में लिखी थी। स्वामी दयानंद जी महाराज ने भी 1863 ईस्वी में विमान के बनाने के बारे में अपने विचार व्यक्त किए थे। जिस पर उस समय की अंग्रेज सरकार को भी भरोसा नहीं हो रहा था और वह स्वामी जी के इस प्रकार के विचारों की खिल्ली उड़ा रही थी। परंतु बाद में सारी दुनिया जान गई कि स्वामी दयानंद जी अपनी जगह ठीक थे। इस बैठक में पूर्ण पहलवान, प्रधान बलबीर सिंह आर्य, प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य, मास्टर दिनेश आर्य, गिरिराज आर्य प्रधान अस्तौली आर्य समाज, राजेंद्र सिंह आर्य, मास्टर विजय सिंह, हेम सिंह आर्य, संतराम आर्य आदि ने अपने विचार व्यक्त किये और आगामी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सहयोग देने का आश्वासन दिया।
बैठक में आर्य भाषा प्रचारिणी सभा के जिला अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर, वेद प्रचारिणी सभा के जिला अध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य, धर्म आर्यसभा के जिला अध्यक्ष स्वामी वेदानंद सरस्वती जी महाराज, आगामी कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्ण पहलवान, योग प्रमुख प्रताप सिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य, हेम सिंह आर्य, हरस्वरूप आर्य, रामप्रसाद आर्य, महेंद्र सिंह आर्य , आर्य प्रतिनिधि सभा की महिला प्रकोष्ठ की जिला उपाध्यक्ष संजू आर्या, लोकेश आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य जन उपस्थित रहे।

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