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मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी

मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी

कुमार महेंद्र
आध्यात्म शक्तिपुंज व्यक्तित्व,
रग रग कृष्ण भक्ति प्रवाह ।
निर्भीक निडर निरपेक्ष छवि,
लोक उपकार भाव अथाह ।
रजवाड़ी आन बान शान मुकुट,
सामाजिक समरसता प्रदायिनी ।
मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी ।।


दूर हिंदू जन मन भय संकोच,
नारी भोग्य स्वरूप प्रतिकार ।
चेतना जागृति परम हस्ताक्षर,
आत्मविश्वास व्यक्तित्व आधार ।
जन हृदय प्राण वायु रूप,
सदा अनैतिकता विरुद्ध प्रवाहिनी ।
मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी ।।


कदम सिंहासन मृत्यु भय परे,
सहन_वहन प्रतिकूल वातावरण ।
नवधा भक्ति केंद्रित_जीवन ,
हटा अंधविश्वासी सोच आवरण ।
आत्म तत्व छत्र छाया तले,
मोहक स्वत्व पहचान रागिनी ।
मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी ।।


देह पटल देवालय मनोरमा,
गिरधर अंतर प्रियतम दर्शन ।
सहज सरल काव्य लेखनी,
हर कृति उपासना स्पर्शन ।
सांसारिक त्रिविध ताप निस्तारक,
प्रातः वंदनीय क्रांति दृष्टा भामिनी ।
मीरा बाई,मरुस्थल की मंदाकिनी ।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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