विज्ञान की भोर,वैदिक ज्ञान से सराबोर
कुमार महेंद्र
श्रुति ग्रंथ अप्रतिम महत्ता,
ब्रह्म आलोक स्पंदन ।
कारण प्रयोग प्रभाव तथ्य,
स्वप्न प्रभा यथार्थ वंदन ।
भौतिकी रसायन गणित संग,
चिकित्सा प्रगति चारों ओर ।
विज्ञान की भोर,वैदिक ज्ञान से सराबोर ।।
विज्ञानी तपन जपन,
लक्ष्य दीप्त उर धारा ।
खगोल अनूप संधान क्षेत्र,
ज्ञान प्रेरणा पुंज सारा ।
कृत्रिम बुद्धि सफलता क्षेत्र,
अविरल मनुज संवेदन ठौर ।
विज्ञान की भोर,वैदिक ज्ञान से सराबोर ।।
नारी शक्ति प्रतिभा पुंज,
हर कदम हर्ष उल्लास ।
संकल्प विकसित राष्ट्र निर्माण,
उन्नति दिशा दिव्य उजास ।
आलोकित नित संघर्ष पथ,
पर्यावरण हित प्रयास पुरजोर ।
विज्ञान की भोर,वैदिक ज्ञान से सराबोर ।।
शुन्य सह शिखर बिंदु परिध,
ब्रह्मांड अनुपम विवेचना ।
ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद संग,
अथर्ववेद महत्ता संचेतना ।
मानवता उत्थान परम ध्येय,
खुशियां जन्य प्रौद्योगिकी छोर ।
विज्ञान की भोर,वैदिक ज्ञान से सराबोर ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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