ख्यालों में हो

ख्यालों में हो

संजय जैन
बनाने वाले ने भी तुम्हें
क्या खूब बनाया है।
पूर्णिमा के चाँद जैसा
उसने तुम्हें बनाया है।।


चाँदनी रात में लाया है
चाँद जैसा चेहरा बनाया है।
गुलाब की तरह खिलाया है
इसलिए हमको तुम भाया है।।


मुझे भी क्या उसने
तुम्हारे लिए बनाया है।
और तेरे सपने मुझे
रोज रोज दिखाया है।।


सपने में बार-बार देख
मन भी मचल रहा है।
और तेरे ख्यालों में ही
दिल अब डोल रहा है।।


क्या किस्मत का द्वार
मेरा खोलने जा रहा है।
क्योंकि हसीन वादियों ने
मुझे बाग में बुलाया है।।


चाँदनी रात में उसने
चाँद से मिलवाया है।
फिर उसने जन्नत के
दर्शन आज हमें कराया है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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