तेरा मेरा प्रेम अजर अमर
कुमार महेन्द्रअलौकिकता परम स्पंदन,
अंतःकरण पुनीत कामनाएं ।
आशा उमंग उल्लास अथाह,
चितवन मृदुल मधुर भावनाएं ।
कल्पना अंतर यथार्थ बोध,
प्रति आहट प्रियतम स्वर ।
तेरा मेरा प्रेम अजर अमर ।।
हर पल अनंत अभिलाष,
मिलन हेतु सौम्य तत्पर ।
मुस्कान वसित भव्य छवि,
आस्था विश्वास परस्पर ।
चाहना तृषा असीम अनूप,
तृप्ति धार अनुपमा अधर ।
तेरा मेरा प्रेम अजर अमर ।।
मस्त मलंग परिवेश छटा,
नैसर्गिक दृश्य मनमोहक ।
संसर्ग विचार पीठिका,
सृजन सृष्टि सदैव रोहक ।
अंतरंग बिंदु कमनीय स्पर्श,
अंग प्रत्यंग यौवन निर्झर ।
तेरा मेरा प्रेम अजर अमर ।।
जन्म जन्मांतर प्रणय अनुबंध,
रग रग दैविक आभा उजास ।
जीवन पथ प्रेम पर्याय भाषा,
सर्वत्र खुशियां आनंद उल्लास ।
हिय हिलोर शुभ मंगलाचरण,
प्रीत प्रतीक्षा काल अति मनहर ।
तेरा मेरा प्रेम अजर अमर ।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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