शब्दवीणा के राष्ट्रीय कवि सम्मेलन "देश मेरा रंगीला" में बही देशभक्ति की काव्यगंगा

- सच्चाई लिखना भी यदि नादानी है, मैंने नादानी करने की ठानी है।
- जाति, धर्म की बातें करना बंद करो। हिन्दुस्तानी केवल हिन्दुस्तानी है
- मैं कलम से हौंसलों को वीर रस के छंद दूँगा
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा द्वारा भारत देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर "देश मेरा रंगीला"राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें उत्तराखंड से महावीर सिंह वीर, आशा साहनी, दिल्ली से आशा दिनकर, उत्तर प्रदेश से अनुराग दीक्षित, रामदेव शर्मा राही एवं रमेश चंद्र दीक्षा माथुर, पश्चिम बंगाल से पुरुषोत्तम तिवारी एवं हिमाद्रि मिश्रा, महाराष्ट्र से डॉ कनक लता तिवारी, कर्नाटक से सुनीता सैनी गुड्डी, विजयेंद्र सैनी, गया, बिहार से डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, जैनेन्द्र कुमार मालवीय एवं विनोद बरबिगहिया, जहानाबाद, बिहार से दीपक कुमार एवं हरियाणा से सरोज कुमार, कीर्ति यादव, मधु वशिष्ठ, दीक्षा माथुर ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएँ पढ़ीं। शब्दवीणा के राष्ट्रीय मंच पर देशभक्ति की काव्यगंगा बही। कार्यक्रम का शुभारंभ शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने स्वरचित सरस्वती वंदना "ज्ञान दे, सुर तान दे। माँ शारदे वरदान दे" प्रस्तुति से की। मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल की कवयित्री हिमाद्रि मिश्रा ने सुमधुर स्वर में शब्दवीणा गीत गाया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता शब्दवीणा कर्नाटक प्रदेश उपाध्यक्ष तथा जल सेना के सेवानिवृत्त अनुभवी अधिकारी विजयेंद्र सैनी ने की। उन्होंने बतौर नौसेना अधिकारी अपने चुनौतीपूर्ण अनुभवों को साझा किया। देशप्रेम पर शानदार रचनाएँ पढ़ीं। कार्यक्रम का संचालन शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश सचिव सरोज कुमार ने किया।
कवि सम्मेलन में महावीर सिंह वीर की "सच्चाई लिखना भी यदि नादानी है, मैंने नादानी करने की ठानी है। मैं उन लोगों की खातिर ही लिखता हूँ, जिनकी आँखो में थोड़ा-सा पानी है। जाति, धर्म की बातें करना बंद करो। हिन्दुस्तानी केवल हिन्दुस्तानी है" सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। श्री वीर के मुक्तकों पर खूब वाहवाहियाँ लगीं। डॉ रश्मि की "जियेंगे देश की खातिर, मरेंगे देश की खातिर। दीप बन रौशनी जग में भरेंगे देश की खातिर" को भी मंच से खूब सराहना मिली। आशा दिनकर की "ये जन-जन का गौरव है, सबका अभिमान तिरंगे में। लहर-लहर लहरा रहा भारत की शान तिरंगे में", रमेश चंद्र की "गगन में लहरे है तिरंगा, तुम लहराए जाओ ना", सुनीता सैनी गुड्डी की "ओढ़कर यों तिरंगा, क्यूं चल दिये? छोड़ प्यारे वतन को क्यूं चल दिये", हिमाद्रि मिश्रा की "तिरंगों में लिपटकर सरहदों से जो लाल आते हैं, उन्हें तुम याद कर लेना, मेरा मन चैन पायेगा", राम देव शर्मा की "अमर हो गई जवानी। खुशी से दी कुर्बानी"; जैनेन्द्र कुमार मालवीय की "कटा लो लाल सर अपने, न झुकने दो तिरंगे को", मधु वशिष्ठ की "नमन करो उन शहीदों को, जिनके कारण भारत माँ खुशहाल है", दीपक कुमार की "मैं कलम से हौंसलों को वीर रस के छंद दूंगा" ने वातावरण को ओज गुण और वीर रस से सराबोर कर डाला।
आशा साहनी की "स्वतंत्रता के भाव को निखारती माँ भारती, चलो उतारें आरती", कीर्ति यादव की "वंदन है इस पावन ध्वज को, वंदन है संविधान को", डॉ कनक लता तिवारी की घनाक्षरी "देश के जवान हैं ये, कितने महान हैं", कक्षा नवम की युवा कवयित्री दीक्षा माथुर की "नैतिकता सिखाये हमें हमारा संविधान", अनुराग दीक्षित की "मैं भारत हूँ" ने पूरे कार्यक्रम को देशभक्ति के रंगों में रंग दिया। सरोज कुमार ने नागालैंड की झांसी की रानी कही जाने वाली वीरांगना रानी गाइदिन्ल्यू पर रचित कविता पढ़ी। श्री सैनी के अध्यक्षीय वक्तव्य के उपरांत शब्दवीणा पश्चिम बंगाल संरक्षक पुरुषोत्तम तिवारी ने सभी रचनाकारों को 77वें गणतंत्र की शुभकामनाएं दीं। धन्यवाद ज्ञापन कीर्ति यादव ने किया। कवि सम्मेलन का समापन राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम से हुआ। साढ़े तीन घंटों तक निर्बाध रूप से चले कवि सम्मेलन का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे जुड़कर शिब्बू चाहर, पी. के. मोहन, सुरेश गुप्ता, जनार्दन प्रसाद मिश्र, ललित शंकर, डॉ विजय शंकर सहित देश भर के साहित्यानुरागियों ने शब्दवीणा की काव्यगंगा का दर्शन लाभ उठाया।
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