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आज निकली है धूप सजीली

आज निकली है धूप सजीली

डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी
बहुत दिनों के बाद आज
निकली है धूप सजीली।
छैल-छबीली, पीली-पीली।
रंग-रंगीली दिखती दुनिया।।
छंटा कुहासा, जागी गलियाँ।
चमक उठी फूलों की डलियाँ।।
नाच उठी सरसों अलबेली।
मटर, मूंग, अरहर की फलियाँ।।
गाओ गीत हर्ष में, नये वर्ष में।
खिली हृदय में कलियाँ।
सुरभित आशाओं की।
एवं मधु अभिलाषाओं की।।
ले अंगड़ाई मीठी-मीठी।
छोड़ रजाई, बुझा अंगीठी।।
धूप सेंककर सुख पाती हैं।
थर-थर कंपती हुईं उंगलियाँ
उड़ीं पतंगें स्वर्णिम नभ में।
धुंधले-धुंधले आसमान में।।
कुलबुल-कुलबुल है तरुओं पर।
चुलबुल-चुलबुल हर मकान में।।
बदल गयी धरती की रंगत।
मिली धूप की ज्यों ही संगत।
थम-सी गयी हवा सर्दीली।
लगा मनाने जग रंगरलियाँ।।
डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी
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