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लोकतंत्र का सबसे बड़ा सार्वजनिक पर्व - “गणतंत्र दिवस”

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सार्वजनिक पर्व - “गणतंत्र दिवस”

दिव्य रश्मि के उपसम्पादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की कलम से |

भारत का गणतंत्र दिवस केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि देश की आत्मा, संविधान की चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है। हर वर्ष 26 जनवरी को पूरा देश संविधान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराता है। बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान इस राष्ट्रीय पर्व का साक्षी बनता आया है। वर्ष 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इस अवसर पर गांधी मैदान एक बार फिर लोकतंत्र, संस्कृति, विकास और प्रशासनिक समन्वय का विराट मंच बनने जा रहा है।

पटना का गांधी मैदान केवल एक खुला मैदान नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक आंदोलनों का जीवंत इतिहास है। महात्मा गांधी से लेकर जयप्रकाश नारायण तक, अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने यहीं से जनता को संबोधित किया। स्वतंत्रता के बाद गणतंत्र दिवस समारोह ने गांधी मैदान को एक संवैधानिक उत्सव स्थल के रूप में स्थापित किया है।

77वां गणतंत्र दिवस इसलिए भी विशेष है क्योंकि भारत आज विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। डिजिटल गवर्नेंस, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा मजबूत हुई है। राज्यों की भूमिका राष्ट्र निर्माण में और अधिक निर्णायक हो गई है। बिहार जैसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में यह आयोजन विशेष महत्व रखता है।

राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। ध्वजारोहण के साथ ही राष्ट्रगान का सामूहिक गायन, परेड की सलामी, शांति और एकता का संदेश, पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो जाएगा।

जिला प्रशासन की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह के लिए व्यापक और बहुस्तरीय तैयारियां की गई हैं। गांधी मैदान को विभिन्न जोनों में विभाजित किया गया है। आम नागरिकों, विशिष्ट अतिथियों और मीडिया के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था है। आपात सेवाओं की 24×7 तैनाती है। स्वच्छता, पेयजल और शौचालय की विशेष व्यवस्था की गई है।

गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। एंटी-सैबोटाज चेक की व्यवस्था, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी, सिविल ड्रेस में खुफिया एजेंसियां और आपदा प्रबंधन दल अलर्ट मोड में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समारोह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और गरिमामय ढंग से संपन्न हो।

इस वर्ष गांधी मैदान में 12 विभागों की झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। ये झांकियां केवल दृश्य आकर्षण नहीं है, बल्कि नीतियों, उपलब्धियों और सामाजिक परिवर्तन की कहानी कहेगी। यह झांकी बिहार की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएगी, जिसमें मिथिला पेंटिंग, बोधगया और नालंदा, छठ पर्व और लोक नृत्य, रामायण और बौद्ध विरासत शामिल है। यह झांकी पर्यटन को रोजगार और पहचान से जोड़ने का संदेश देगी।

परिवहन विभाग की झांकी में सड़क सुरक्षा, ई-वाहन, स्मार्ट लाइसेंस और डिजिटल सेवाएं दिखाई जाएंगी। यह झांकी “सुरक्षित यात्रा, समृद्ध बिहार” का संदेश देगी।

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की झांकी न्याय तक समान पहुंच की अवधारणा को उजागर करेगी, लोक अदालत, निःशुल्क कानूनी सहायता, महिला और बाल अधिकार दिखाई जायेगी। यह संदेश देगी कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं।

जीविका और ग्रामीण विकास विभाग की झांकी में स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमिता और ग्रामीण आत्मनिर्भरता दिखाई जायेगी। यह बिहार में महिला सशक्तिकरण की क्रांति का प्रतीक होगी।

ऊर्जा विभाग की झांकी में हर घर बिजली, सौर ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड दर्शाए जाएंगे, जो बिहार की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को रेखांकित करेंगे।

सहकारिता विभाग की झांकी में दुग्ध सहकारिता, कृषि सहकारी समितियां और ग्रामीण आर्थिक मॉडल को प्रस्तुत करेगी।

अग्निशमन विभाग की झांकी में आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा और आधुनिक उपकरण के माध्यम से जीवन रक्षा का संदेश देगी।

कृषि विभाग की झांकी में जैविक खेती, फसल विविधीकरण, किसान कल्याण योजनाएं दिखाई जाएंगी।

शिक्षा विभाग की झांकी में डिजिटल क्लासरूम, बालिका शिक्षा और कौशल विकास पर फोकस रहेगा।

उद्योग विभाग की झांकी में स्टार्टअप, MSME और निवेश संभावनाएं दर्शाएगी।

मद्य निषेध विभाग की झांकी में नशा मुक्त समाज, सामाजिक सुधार, महिला सुरक्षा का संदेश देगी।

गणतंत्र दिवस केवल सरकारी आयोजन नहीं है, बल्कि जन उत्सव है। स्कूली बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं, सभी इसमें भागीदार बनते हैं। यह दिन नागरिकों को, संविधान का सम्मान, कर्तव्यों का पालन और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की याद दिलाता है।

मीडिया की भूमिका सूचनाओं का प्रसार, लोकतांत्रिक चेतना, जनभागीदारी को बढ़ावा देने में अहम रहती है।

गांधी मैदान में आयोजित यह समारोह बिहार की ऐतिहासिक भूमिका, सामाजिक परिवर्तन और विकास की दिशा को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है।

77वां गणतंत्र दिवस समारोह यह साबित करता है कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं है, बल्कि एक सतत लोकतांत्रिक यात्रा है। पटना का गांधी मैदान इस यात्रा का साक्षी बनकर एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है, जहां संविधान, संस्कृति और नागरिक चेतना एक साथ खड़े दिखाई देंगे।

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