(राष्ट्रीय बालिका दिवस _2026)
बालिकाएं गढ़ रहीं हैं, नित्य नव कीर्तिमान
कुमार महेन्द्रमनुज सौभाग्य उदयन,
मंगलता घर द्वार प्रवेश ।
सुख समृद्धि वैभव सेतु,
हर्षित पुलकित परिवेश ।
मृदुल मधुर पावन सरिता,
मात पिता गौरव मुस्कान ।
बालिकाएं गढ़ रहीं हैं,नित्य नव कीर्तिमान ।।
सृजन दिव्य अठखेलियां,
कुल वंश परिवार वंदन ।
धर्म कर्म परम शोभना,
मर्यादा सुसंस्कार मंडन ।
शिक्षा खेलकूद ओज भर,
तत्पर अदम्य हौसली उड़ान ।
बालिकाएं गढ़ रहीं हैं,नित्य नव कीर्तिमान ।।
रग रग दर्श शाश्वतता,
शक्ति भक्ति अनन्य बिंदु ।
आत्म विश्वास मैत्री बंधन,
संघर्ष पथ विजयी सिंधु ।
शुद्ध सात्विक आचार विचार,
प्रेरणापुंज नैतिक आह्वान ।
बालिकाएं गढ़ रहीं हैं,नित्य नव कीर्तिमान ।।
देहरी प्रांगण अति शोभित,
कुटुंब समाज राष्ट्र रत्न ।
अंतर्मन आत्मविश्वास निर्झर,
सफलता हित घोर प्रयत्न ।
अधिकार डिजिटल सशक्ति माध्य,
सदैव तिरंगी आन बान शान ।
बालिकाएं गढ़ रहीं हैं,नित्य नव कीर्तिमान ।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना )
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com