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छह दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला का भव्य समापन, बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने बिखेरा रंग

छह दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला का भव्य समापन, बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने बिखेरा रंग

पटना।
बिहार ललित कला एवं भारतीय नृत्यकला मंदिर की ओर से आयोजित छह दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला का समापन आज उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी तथा भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी कहकंशा ने विभिन्न विधाओं में भाग लेने वाले सभी बच्चों को सर्टिफिकेट एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यशाला में सरस्वती विद्या मंदिर कदम कुआं पटना के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही। बच्चों ने एक ही मंच पर अनेक कलाओं में दक्षता का परिचय देते हुए यह सिद्ध किया कि जब वे किसी कला से जुड़ते हैं, तो केवल सीखने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसे निरंतर समृद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
विविध कलाओं का संगम

इस शीतकालीन कार्यशाला में अनुभवी मेंटर्स द्वारा बच्चों को चित्रकला, काष्ठ कला, हस्तकला के साथ-साथ नृत्य कला का भी व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान बच्चों की रचनात्मक सोच, कल्पनाशीलता और अनुशासन स्पष्ट रूप से देखने को मिला। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रस्तुत की गई कलाकृतियों और नृत्य प्रस्तुतियों ने अभिभावकों और अतिथियों को गहरे प्रभावित किया।
कला से संस्कार और आत्मविश्वास

समापन समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का विकास करती हैं। कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन है।

कार्यक्रम के अंत में भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी कहकंशा ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, बच्चों एवं उनके अभिभावकों का धन्यवाद ज्ञापन किया और भविष्य में भी ऐसी रचनात्मक व सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।यह शीतकालीन कार्यशाला न केवल बच्चों के लिए सीख और अभ्यास का मंच बनी, बल्कि पटना की सांस्कृतिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करने में सफल रही।
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