इतना भी आसान कहाँ है?
अ कीर्ति वर्द्धनसुबह सवेरे जल्दी उठना, इतना भी आसान कहाँ है,
सर्द सुबह में घूमने जाना, इतना भी आसान कहाँ है?
कभी पिया न पानी लेकर, हमने चाय बनाई नहीं,
चाय बनाकर रोज पिलाना, इतना भी आसान कहाँ है?
शादी की बातें सोच सोच कर, लड्डू फूटा करते मन में,
शादी करके जीवन यापन, इतना भी आसान कहाँ है?
रोज़ सवेरे सामानों की, फ़ेहरिस्त हमें मिल जाती है,
कम आय में घर चलाना, इतना भी आसान कहाँ है?
पत्नी की फ़रमाइश हमको, सुरसा मुख सी लगती हैं,
सुखमय जीवन जीना यारों, इतना भी आसान कहाँ है?
नये दौर में बच्चे हमको, खंडहर पुराना बतलाते हैं,
कदमताल बच्चों संग करना, इतना भी आसान कहाँ है?
हम जीते रिश्तों की खातिर, रिश्तों पर सब क़ुर्बान,
रिश्तों में रस बन कर जीना, इतना भी आसान कहाँ है?
तन्हाई का दौर चल रहा, सब कुछ है पर तन्हा सब,
संवादों की मरहम लगाना, इतना भी आसान कहाँ है?
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com